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मधुबन में जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव आज से, मुनि प्रमाण सागर के सान्निध्य में होंगे धार्मिक अनुष्ठानमधुबन के गुणायतन में सिंगापुर-मलेशिया से आए श्रावकों की ओर से निर्मित जिनबिंबों का प्रतिष्ठा महोत्सव होगा

धर्म

मधुबन में जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव आज से, मुनि प्रमाण सागर के सान्निध्य में होंगे धार्मिक अनुष्ठानमधुबन के गुणायतन में सिंगापुर-मलेशिया से आए श्रावकों की ओर से निर्मित जिनबिंबों का प्रतिष्ठा महोत्सव होगा
मधुबन
गुणायतन परिसर में सोमवार से सिंगापुर और मलेशिया से आए श्रावकों की उपस्थिति में सिंगापुर में निर्मित जिनालय में चौबीसी विराजमान कराने हेतु जिनबिंबों की प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन मुनिश्री 108प्रमाण सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में संपन्न होगा।

 

 

गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 27 अप्रैल को प्रातः 5:45 बजे मंगलाष्टक के साथ ध्वजारोहण, पात्र शुद्धि, मंडप शुद्धि एवं गर्भकल्याणक की क्रियाओं के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। दोपहर 3:30 बजे आयोजित आराधना सार ग्रंथ की कक्षा में मुनि प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि निश्चय आराधना से ही केवलज्ञान की प्राप्ति संभव है।Promotional poster with a man in a suit and Hindi quote about recognizing personal talents, plus contact numbers at the bottom left.Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.

 

 

उन्होंने बताया कि केवलज्ञान आत्मा की पूर्ण जागृत अवस्था है, जो बाहरी साधनों से नहीं बल्कि आत्मानुभूति और आंतरिक शुद्धि से प्राप्त होती है।

 

जब साधक निश्चय आराधना में स्थिर होता है, तो अज्ञान का अंधकार समाप्त होकर आत्मा का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है। मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि मोक्ष का आधार बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि आंतरिक साधना है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे बीज को वृक्ष बनने के लिए उसकी क्षमता,जल-मिट्टी का निमित्त और समय आवश्यक होता है, वैसे ही आत्मा को मोक्ष के लिए शुद्ध परिणाम, साधना और उपयुक्त काल का संयोग चाहिए।

 

संध्याकालीन शंका-समाधान सत्र में विदेश से आए श्रावकों ने जिनालय के उपयोग को लेकर कई प्रश्न किए। इस पर मुनि श्री ने सुझाव दिया कि
यदि मंदिर दूर हो तो घर-घर नियमित पूजन और स्वाध्याय की परंपरा शुरू की जाए तथा सप्ताह में कम से कम एक दिन सामूहिक अभिषेक और पूजन आयोजित किया जाए।

 

उन्होंने महिलाओं से भक्ति मंडली बनाकर भजन-स्तवन, मासिक प्रतिक्रमण और स्वाध्याय करने का आह्वान किया। बच्चों को णमोकार मंत्र, पंच परमेष्ठी और तीर्थंकरों का परिचय कराने तथा युवाओं को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया, ऑनलाइन समूह, चर्चा सत्र और धार्मिक क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित करने की सलाह दी।

 

मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक वातावरण से मानसिक शांति मिलती है और शांति से लिए गए निर्णय जीवन व व्यवसाय दोनों में सफलता दिलाते हैं। उन्होंने व्यापार में सत्य, विनय और विश्वास बनाए रखने, कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करने तथा लाभका एक हिस्सा धर्म और सेवा में लगाने की प्रेरणा दी। साथ ही प्रतिदिन कार्य प्रारंभ करने से पहले णमोकार मंत्र के जाप की भी सलाह दी।

 

उन्होंने विदेश में भगवान की स्थापना को बड़ा सौभाग्य बताते हुए कहा कि नियमित भक्ति, युवाओं की भागीदारी और महिलाओं की सक्रिय भूमिका से धर्म के साथ-साथ समाज भी जैन सशक्त बनेगा। कार्यक्रम में मुनि संधान सागर, मुनि सार सागर, मुनि समादर सागर एवं मुनि रूप सागर भी मंचासीन रहे। संचालन अशोक भैया एवं अभय भैया आदित्य ने किया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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