गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी ससंघ सान्निध्य में रामलाल मैदान जयपुर में सकल जैन समाज ने मनायी 2623 वीं महावीर जयंती
जयपुर
श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी के शासन में विराजमान उनके ही अनुयायी आचार्य श्री 108 चैत्यसागर जी एवं आचार्य श्री 108 शशांक सागर जी महाराज ससंघ भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी, का मिलन जन-जन में एकता का संदेश दे रहा है। राजस्थान जैन सभा जयपुर के तत्त्वावधान में 2623 वीं महावीर जयंती का आयोजन आचार्य चैत्यसागर जी, आचार्य शशांक सागर जी, गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के पावन सान्निध्य में सानंद सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरूआत मंगलाचरण, चित्रअनावरण, दीप प्रज्वलन के साथ हुई। पूज्य माताजी ने सकल जयपुर जैन समाज के लिए उद्बोधन देते हुए कहा कि- आज सम्पूर्ण जैन समाज को एक होने की जरूरत है। क्योंकि भगवान महावीर एक थे, उनका संदेश एक था।






भगवान महावीर ने भी क्या अनोखा सिद्धांत रखा है” जिओ और जीने दो”। यह अहिंसा का सबसे उत्कृष्ट सिद्धांत है। जैन धर्म के सितारे एवं अहिंसा के दूत भ. महावीर स्वामी का अहिंसा तत्व इतना व्यापक है कि इसके उदर में सब धर्म आ जाते है। उनके द्वारा प्रदत्त अहिंसा, प्रेम, करुणा के उपदेशों को जीवन में उतारें।
तत्पश्चात् पूज्य गुरूमाँ के श्री चरणों में सेठी कालोनी एवं जनकपुरी जैन समाज के पदाधिकारी दीनदयाल पाटनी धर्मचंद कासलीवाल, पद्मचंद बिलाला ने श्रीफल समर्पित किया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
