केंद्रीय जेल सागर में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज विनयांजलि सभा हुई आहूत आचार्य श्री के लिए कितना भी बोलते जाएं लेकिन शब्द कम हो जाएंगे न्यायाधीश अरविंद जैन
सागर
केंद्रीय जेल सागर में स्थित चक्र महामंडल विधान के समापन की बेल के उपरांत आचार्य श्री विद्यासागर महाराज विनयाजली सभा आहूत की गई।
इस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में छतरपुर जिला सत्र न्यायाधीश अरविंद जैन रहे। श्री जैन ने कहा कि आचार्य श्री के लिए कितना भी बोलते जैन शब्द कम हो जाएंगे। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर 57 छात्र छात्राओं ने पीएचडी की है। और कुछ अभी कर रहे हैं। वे एकमात्र ऐसे संत थे जिन पर शोध हो रहा है। गुरुदेव की जय जयकार करने के साथ-साथ उनके आदर्शों पर चलना सही विनयाजलि होगी।

उन्होंने कहा कि उन्हें संत शिरोमणि ऐसे ही नहीं कहा जाता था। उनके लिए यह उपाधि सर्वमान्य समाज द्वारा प्रदान की गई थी। जैन समाज घर बैठे आचार्य श्री के प्रकल्पों पर दान देना जानती है। आचार्य श्री ने दान देने की परंपरा सिखलाई। जैन समाज दान देने वाली समाज के रूप में अग्रणी है। मंदिर में चढ़ाई गई द्रव्य को भी समाज के लोग निर्माल्य मानते हैं। उसका कहीं अपने घरों पर उपयोग नहीं करते है।


इस अवसर पर जिला न्यायाधीश मनीष भट्ट ने भी अपने विचार रखें और कहा कि आचार्य श्री महान विभूति थे। वे साक्षात धर्म थे। दुनिया में 300 धर्म है। लेकिन जिनके अंदर 10 लक्षण धर्म समाहित हो, ऐसे आचार्य श्री विद्यासागर महाराज थे। उनके एक-एक शब्द से धर्म झरता था। उनका जीवन पूरा सत्यवान रहा उन्होंने कभी क्रोध नहीं किया।

इस अवसर पर कलेक्टर दीपक आर्य ने कहा कि बंदियों के सा धारा में आने का अवसर मिला है, कभी गलती जानबूझकर नहीं होती, लेकिन गलती हो जाती है। संत किसी समाज के नहीं होते है, संत समाज के नहीं मानवता के होते हैं। आचार्य श्री के दर्शन का तीन-चार बार अवसर प्राप्त हुआ यह मेरा सौभाग्य है।

इस अवसर पर ब्रह्मचारी संजीव भैया ने कहा कि कुछ व्यक्तित्व
जन्म से महान होते हैं, कुछ को महानता थोपी जाती है। लेकिन आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने महानता अर्जित की है। उन्होंने राष्ट्र के लिए, धर्म के लिए कार्य किए हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
