16 कारण भावनाओ के कारण अर्जित सातिशय पुण्य से तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी आचार्य श्री ने किए केश लोचन 4 मार्च से पंच कल्याणक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों से होगा प्रारंभ।

धर्म

16 कारण भावनाओ के कारण अर्जित सातिशय पुण्य से तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध होता हैआचार्य श्री वर्धमान सागर जी
आचार्य श्री ने किए केश लोचन 4 मार्च से पंच कल्याणक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों से होगा प्रारंभ।
पारसोला।   
जो आत्माएं तीर्थंकर होती है वह वर्तमान भव से तीन भव पूर्ण केवली श्रुत केवली के पाद मूल में 16 कारण भावनाओं को भाकर 148 कर्म प्रकृतियों में सातिशय पुण्यशाली तीर्थंकर प्रकृति का आश्रव करते हैं उन आत्माओं के गर्भ में आने के समय से ही देवता किंकर की तरह सेवा करते हैं।आत्म कल्याण की प्रक्रिया है, पंच कल्याणक सभी तीर्थंकरों का कल्याणक होता हो ऐसा नियम नहीं है,लेकिन भरत व ऐरावत क्षेत्र में होने वाले तीर्थंकरों व विदेह क्षेत्र में होने वाले विद्यमान बीस तीर्थंकर पंचकल्याणक से पूजित होते हैं भूत ,भविष्य, वर्तमान काल में ढाई दीप के भरत ऐरावत संबंधी 10 क्षेत्रों में 720 तीर्थंकर हो सकते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने पंच कल्याणक के माता पिता सौधर्म इंद्र सहित सभी इन्द्रो कमेटी को आशीर्वाद में प्रकट किए। ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या राजेश पंचोलिया अनुसार वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में दिनांक 4 मार्च से पंच कल्याणक प्रारंभ होगा। इसके पूर्व आचार्य श्री सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवम् शांति धारा हुई। जल विविध फलों के रस,द्राक्षा ,नारंगी,दाडिम, सेव फल, रंभा,अन्नानास, आम्र, कीवी ,सीता फल, पपीता,इक्षु,चीकू, अमरूद,संतरा,केला, नारियल सूखे मेवे में काजू, बादाम पिस्ता, अखरोट, शर्करा, घी , दूध, दही, सर्वोषघी ,चार कलश,अनेक लाल ,सफेद चंदन, विभिन्न पुष्प मंगल आरती , सुगंधित जल, अनेक द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक किया। शांति धारा का सौभाग्य शांतिलाल मेंदावत को प्राप्त हुआ।आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी पारसोला जिला प्रतापगढ़ में विराजित है आज आचार्य श्री ने समस्त संघ और भक्तों की उपस्तिथि में केश लोचन किए ।केश लोचन के बारे में मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने धर्म सभा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर साधु को 2 माह से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है । केश लोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है केश लोचन की प्रक्रिया मेंमुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि केश्लोचन करते समय केवल राख का उपयोग किया जाता है मुनि श्री ने बताया कि जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। बाल हाथों से इसलिए उखाड़े जाते हैं कि बालों को कटिंग करने के लिए सेविंग कराने के लिए अन्य द्रव्य की आवश्यकता होती है जैन साधु अपरिग्रही होते हैं। इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं बाल सौंदर्य का प्रतीक हैं इससे राग और आकर्षण होता है। केश लोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केश लोचन के समय तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं उस दिन उपवास करते हैं ।केश लोचन देखकर अनुमोदना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है कर्मों की निर्जरा होती है। इस अवसर पर संघ के साधुओं ने धार्मिक स्रोत का उच्चारण किया।अनेक महिलाओ ने वैराग्य पूर्ण भजन गा कर केशलोचन की तपस्या की अनुमोदना की।मुनि श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री निर्मोह मति माताजी के प्रवचन हुए माताजी ने श्रावको को प्रतिदिन श्रावको के कार्यों को सरल भाषा में बताया कि सभी को भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन स्वाध्याय करना चाहिए दान का महत्व और परिग्रह परिणाम सीमा नियत करने की प्रेरणा दी छोटे छोटे नियम व्रत का फायदा पुण्य अर्जन की बताया। दिगम्बर समाजाध्यक्ष जयंतीलाल कोठरी,पंच कल्याणक समिति अध्यक्ष बाबूलाल सरिया अनुसार 3 मार्च को श्यामा वाटिका में भगवान के मातापिता रमेश चंद शांता देवी वैगरिया परिवार और सौधर्म राजमल कोठरी परिवार की ओर से भक्ति संध्या का आयोजन किया गया है ।4 मार्च को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित पंच कल्याणक स्थल काशी नगरी वर्धमान पंडाल पहुचेंगे । शोभा यात्रा में हाथी घोड़े, बग्घी शताधिक मंगल कलश यात्रा बैंड बाजे,समाज के जय धोश बैंड के आकर्षण रहेंगे ।4 मार्च को पंच कल्याणक में ध्वजारोहण एवं गर्भ कल्याणक सोमवार प्रातः 06.00 बजे नान्दी मंगल व्रतदानप्रातः 7.35 भूमि शुद्धि, घटयात्राप्रातः 9.000 बजे ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, आचार्य निमंत्रण, जाप्यारम्भ प्रातः 10.00 बजे आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के प्रवचन दोपहर 12.30 सकलीकरण, इन्द्र प्रतिष्ठा, मण्डप प्रतिष्ठा, जिनाभिषेक, याग मण्डल पूजा, गर्भ कल्याण संस्कार विधि, पूजा, हवन मध्याह्न 03.00 बजे सीमन्तन संस्कार (माता की गोद भराई उत्सव) शाम 6.30 आरती, शास्त्र सभा, गर्भकल्याणक नाटकीय मंचन किए जावेगे।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *