पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मे शांति कुमार की हुई दीक्षा
पसीना बहाओगे तो स्वस्थ रहोगे नही तो अस्वस्थ ही रहोगे सभी अपना कार्य स्वयं करो आचार्य सुनील सागर
कामा
तीर्थंकर वही बनते है जो जग के कल्याण की भावना रखते हैं जीवो के प्रति करुणा रखते हैं। अयोध्या में पांच तीर्थकरो ने जन्म लिया वही बीसवें तीर्थंकर के काल मे राम ने जन्म लिया उनका भी वंश इक्ष्वाकु ही था उक्त उदगार जैन आचार्य सुनील सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दीक्षा कल्याणक के अवसर पर व्यक्त किये।
आचार्य श्री ने कहा कि वर्तमान में व्यक्ति बड़ा आलसी हो गया है। पसीना बहाओगे तो स्वस्थ रहोगे नही तो अस्वस्थ ही रहोगे सभी अपना कार्य स्वयं करो। आचार्य ने समझाते हुए कहा कि व्यक्ति की चमड़ी की पूजा नही गुणों की पूजा होती है। 
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन भगवान के दीक्षा कल्याण की क्रियाओ से युवराज शांति कुमार के विवाह उत्सव आदि के आयोजन हुए तो धूमधाम के साथ युवराज शांति कुमार की बारात निकाली गई इस अवसर पर युवराज शांति कुमार के भाई बनने का सौभाग्य आकिंचन जैन बल्लभगढ़ को प्राप्त हुआ।
भगवान की हुई दीक्षा

कार्यक्रम में दोपहर की क्रियाओ में युवराज शांति कुमार को वैराग्य हुआ और आचार्य द्वारा दीक्षा प्रदान की तो दीक्षा महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर पीक्षी कमण्डलु भेंट कर मुनि दीक्षा कराई गई तो आचार्य ने कहा कि अब ग्रहस्थों का काम खत्म अब संतों का काम प्रारंभ हो गया है। 
अब यह पाषाण भगवान बनने की ओर अग्रसर है आप सभी को मर्यादित रहते हुए आगे की क्रियाएं करनी चाहिए।
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दूर दराज से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन पधार रहे हैं और जैन समाज के द्वारा उनका स्वागत अभिनंदन भी किया जा रहा है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
