- भगवान पूर्ण ज्ञान के धारी है इसीलिए भगवान को सर्वशक्तिमान ,ज्ञानवान कहा जाता है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
पारसोला
भगवान के बल के बारे में आपने मुनिश्री का प्रवचन सुना प्रभु का अर्थ भगवान होता है भग का मतलब ज्ञान होता है अर्थात जो ज्ञानवान हो,एस शक्तिशाली हो, राग द्वेष रहित हो वह भगवान होते हैं।यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सन्मति भवन पारसोला की धर्मसभा में प्रकट की। गज्जु भैय्या ,राजेश पंचोलिया ,जयंतीलाल कोठरी अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि भगवान के शरीर से निकलने वाला तेज से उनका आभामंडल प्रकाशित होता है हमारे आराध्य भगवान संपूर्ण ज्ञान के स्वामी होते हैं।





आज आप मोबाइल गूगल से ज्ञान प्राप्त करते हैं किंतु भगवान में इतना ज्ञान होता है कि संसार के सभी पदार्थों को वह जानने में सक्षम है क्योंकि भगवान पूर्ण ज्ञान के धारी है इसीलिए भगवान को सर्वशक्तिमान ,ज्ञानवान कहा जाता है। भगवान ने अपनी आत्मा पर लगे कर्म रूपी मेल को हटा दिया ।आप लोगों को पसीना आता है किंतु तीर्थंकर भगवान को पसीना नहीं आता है। तीर्थंकर भगवान जन्म से 10 अतिशय केवल ज्ञान होने पर 10 अतिशय से और देवकृत 14 अतिशय ऐसे 34 अतिशय के धारी होते हैं यह 34 अतिशय से स्थूल रूप से है जबकि उनके गुण की महिमा कोई कर नहीं सकता है ।राग द्वेष संसार के सभी प्राणी में होते हैं किंतु भगवान राग द्वेष से रहित होते हैं आचार्य श्री ने चार पुरुषार्थ की विवेचना में बताया कि

संसारी प्राणी अर्थ और काम दो पुरुषार्थ करता है धर्म पुरुषार्थ करने से मोक्ष पुरुषार्थ मिलता है। और रागी मनुष्य प्राणी मोक्ष प्राप्त नहीं करते हैं। संसार के सभी मनुष्यों में शक्ति गुण विद्यमान है,सभी को भव्यता के साथ शक्ति को प्रकट करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। इसके लिए देव शास्त्र गुरु द्वारा बताए रत्नत्रय धर्म को धारण कर भगवान बनने का पुरुषार्थ कर मनुष्य जीवन को सार्थक करे। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने भगवान के बल शक्ति का गुणानुवाद में बताया कि 12 मनुष्य का बल एक बेल में 10 बेल का बल एक भेसे में 10 भेसे का बल एक घोड़े में ,500 घोड़े का बल एक हाथी में, 1000 हाथी का बल एक सिंह में, 1000 सिंह का बल एक अष्टापद में 1000 अष्टा पद का बल एक बलभद्र में, दो बलभद्र का बल एक नारायण में ,9 नारायण का बल एक चक्रवर्ती में, 100 चक्रवर्ती का बल एक देव में 10 लाख देव का बल एक इंद्र में और अनंता अनंत इंद्र का बल एक भगवान में होता है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मंगलाचरण हुआ आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन के बाद भक्ति पूर्वक पूजन महिला मंडल द्वारा की गई

प्रातः आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में श्री पार्श्व नाथ मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवम् बड़ी शांति धारा का सौभाग्य विनोद,शिखर चंद परिवार को प्राप्त हुआ ।आचार्य श्री सानिध्य में 1008 श्री सुपार्श्व नाथ भगवान का निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
