पटाखे के चलने से, आंखों एवम कानों पर बुरा प्रभाव पड़ता है डॉक्टर कल्याण गंगवाल
दीपावली का पर्व मनाया जा रहा है और पटाखे को भी फोड़ा जा रहा है लेकिन क्या हमने समझा है जाना है क्या हम इस पर सोचेंगे हम इस पर समझेंगे हम सोचे समझे और निर्णय करें।
शाकाहार प्रचारक डॉक्टर कल्याण गंगवाल एमडी मेडिसिन जो सर्व जीव मंगल प्रतिष्ठान पुणे के संस्थापक अध्यक्ष हैं उन्होंने पटाखे के चलने से क्या दुष्प्रभाव होते हैं उसको बताया है।

वह कहते हैं कि पटाखो की तेज रोशनी से एवं बारूद आंखों में जाने की आंखें खराब हो जाती हैं। इसकी तेज आवाज से कानों के पर्दे तक फट जाते हैं।













साथ ही श्वास के रोगियों के लिए यह महापर्व आराधना का नहीं अपितु महायातना का पर्व बन जाता है। यह विडंबना है कि उन्हें अनचाही कैद का सामना करना पड़ता है। यह एक प्रश्न चिन्ह है क्या इस कुकृत्य के जिम्मेदार पटाखा फोड़ने वाले नहीं है।
श्री गंगवाल अपील करते हैं कि अगर आप प्रकृति प्रेमी, पर्यावरण प्रेमी है तो पटाखे न चलाए। क्योंकि पटाखों से प्रकृति एवं पर्यावरण को नुकसान होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
