गुरुदेव ने जो संघ को संस्कार दिए हैं उन्हीं के बताएं मार्ग पर हम सबको चलना है अंकंपमति माताजी

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज

गुरुदेव ने जो संघ को संस्कार दिए हैं उन्हीं के बताएं मार्ग पर हम सबको चलना है अंकंपमति माताजी
सागर
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की शिष्या आर्यिका 105 अंकंपमति माताजी ने कहा कि दक्षिण में जन्मे आचार्य श्री ने बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बनाया और 6 दिन पूर्व अपनी अनंत यात्रा पर निकल गए।

 

उन्होंने कहा गुरुदेव ने संघ को जो संस्कार दिए हैं

 

 

 

 

उन्हीं के बताएं मार्ग पर हम सभी को चलना है। गुरुदेव कहते थे, जब मैं जाऊंगा तो ढूंढते रह जाओगे। किसी को आभास भी नहीं हुआ, और वे अपनी अनंत यात्रा पर निकल गए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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