विनम्रता का उत्कृष्ट उदाहरण समय सागर महाराज द्वारा परिलक्षित करता है कि आचार्य गुरुवर की परंपरा एव श्रमण परंपरा संरक्षित है।
डोंगरगढ़
परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की गुरुकुल परंपरा अक्षुण्ण है। उनके द्वारा दी गई शिक्षाएं उनके द्वारा जो बताया गया वह उनके शिष्यों में परिलक्षित होता है।
जिसका उदाहरण देखने को मिला जब आचार्य परंपरा के भावी आचार्य श्री समय सागर महाराज में नजर आया आचार्य समय सागर महाराज स्वयं के लिए कठोर लेकिन परिणाम में निर्मलता है।
उनके अंदर ज्येष्ठ होने का किंचित मात्र भी एहसास नहीं है। ऐसा देखने को मिला जब संघ में उनके साथ समस्त शिष्यों ने उनके समीप बैठ और उनसे कुछ चर्चा की और जब चर्चा के दौरान उन्हें नमोस्तु करते हुए चरण स्पर्श किया तो पूज्य महाराज श्री के हाथ भी जुड़े हुए नजर आए जो यह बताता है कि आचार्य श्री ने सिखाया की विनम्रता जीवन का एक अनुपम गुण है।


और सभी को साथ लेकर चलना यह संघ का उद्देश्य होना चाहिए।


इस बात का भी परिचायक बनकर सामने है कि आचार्य श्री कहते थे की संघ को गुरुकुल बनाना। और उनके गुरुकुल बनाना सार्थक दिख रहा है। निश्चित रूप से कलयुग में भी सतयुग जैसी शिष्य मंडली का अनुपम उदाहरण पूज्य महाराज श्री समय सागर महाराज ने प्रतीत हो रहा है। यही कहूंगा। 
इनका वंदन करते-करते खुद का वंदन हो जाता है।
दर्शन कर चरण रज लेकर हृदय कमल खिल जाता है।
गुरु चरणों की छांव लिए रोम रोम पुलकित हो जाता है।
जनमानस पर यह दृश्य अमिट उदाहरण दे जाता है।
विनम्रता का अनुपम उदाहरण यह छायाचित्र हो जाता है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
