गुरुदेव के पाद मूल में जो बैठ जाता वह उन्ही का हो जाता मुनिश्री निस्वार्थ सागर महाराज

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज

गुरुदेव के पाद मूल में जो बैठ जाता वह उन्ही का हो जाता मुनिश्री निस्वार्थ सागर महाराज
सागर
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य पूज्य मुनि श्री निस्वार्थ सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रति अपने भाव प्रकट किए

उन्होंने कहा जैन साधुओं के प्रति पूरे विश्व में श्रद्धा है। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की चर्या को देख लाखों लोग उनके दर्शन को लालायित रहते थे। आचार्य श्री ने संघ को एक गुरुकुल बना दिया।

 

 

 

उन्होंने कहा आचार्य श्री मोक्ष मार्ग के पारखी थे, और उन्होंने भव्य जीवन को पहचान कर दीक्षा दी है। गुरुदेव के पादमूल में जो बैठ जाता वह उन्ही का हो जाता था। उन्होंने कहा नियम कोई छोटा बड़ा नहीं होता। गुरुदेव ने हमेशा कल्याण पर जोर दिया है। जैसे विद्याधर आचार्य ज्ञानसागर महाराज के पास उड़कर आए थे। और उन्हीं के होकर रह गए। इस प्रकार वे उड़कर ही चले गए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *