अन्तर्मना उवाच हमें किसी व्यक्ति के गुण नहीं दिखते, सिवाय दोष और कमी के। प्रसन्नसागर महाराज
एक संत ने दीवार पर बड़ा सा सफेद पेपर लगाया और मार्कर पेन से पेपर के बीच में काला डाॅट लगा दिया। फिर सब लोगों से पूछा-? इस पेपर में सबको क्या दिख रहा है-? सबने एक स्वर में कहा – महात्मा जी इसमें काला डाॅट दिख रहा है। तब संत ने भरी हुई आवाज में कहा – इतना बड़ा सफेद पेपर नज़र नहीं आया। एक छोटा सा काला डाॅट नजर आया। यही हाल तुम्हारी ज़िन्दगी का है। हमें किसी व्यक्ति के गुण नहीं दिखते, सिवाय दोष और कमी के।
अब रिश्तों में कमी – दोष खोजने का नहीं, समादर करने का भाव रखें।अब किसी को परखने का नहीं, समझने का प्रयास करें।क्योंकि द्वेष, ईर्ष्या, कषाय की आग अति गहरी और बड़ी आंतरिक होती है। इससे हमारा अपना ही अकल्याण और अशुभ चिन्तन में सारा वक्त

पर गुजरता है। ऐसा भाव ही हमारे भावी दुःखों का निमंत्रण है।





सौ बात की एक बात
दूसरों के लिए कुआं खोदने से पहले,
अपने लिये बंगाल की खाई तैयार हो जाती है…!!नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
