आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की अलौकिक आशीष मुद्रा जिसे 6 दिसंबर 2014 को नेमावर में मेरे द्वारा कैद किया गया
परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जब आशीष देते थे तो उनको देख और उनकी आशीष लेने के लिए लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ जाती थी।
यह उनकी साधना का परिणाम था मैं एक ऐसी स्मृति को सांझा कर रहा हूं इस छायाचित्र के माध्यम से 6 दिसंबर 2014 का वह समय प्रातः की बेला और उस दिन मेरा जन्मदिन था मन में एक आस लेकर गया कि गुरुदेव की आशीष लेनी है। और गुरुदेव को मंगल आहार देना है।





पूज्य गुरुदेव उस समय सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर में विराजमान थे सुबह का समय हुआ गुरुदेव के कक्ष का द्वार खुला और गुरुदेव को सामने पाया और उनके चरणों की रज मस्तक पर लगाई। फिर समस्त संघ की गुरु भक्ति में सम्मिलित हो गया। उसके उपरांत गुरुदेव की पूजन में सम्मिलित हुआ।
पूजन के समय गुरुदेव ने जब आशीष सभी पर बरसाई तो उनकी आशीष की मुद्रा कुछ अलौकिक प्रतीत हो रही थी। जिसे मैने अपने।केमरे में कैद कर लिया। उसके उपरांत गुरुदेव को आहार देने का भी अवसर मिला। आहार उपरांत जब गुरुदेव वापस लौटे तो वह बरामदे में विराजमान हुई तब रामगंजमंडी का नाम लेते हुए मेरा भी नाम पुकारा गया तो गुरुदेव को जब मैं नमोस्तु किया तो गुरुदेव ने अपने हाथ को उठाकर मुझे मंगल आशीर्वाद प्रदान किया आज गुरुदेव नहीं है लेकिन उनका जो आशीर्वाद मुझे मिला वह आज भी मेरी स्मृति पर अंकित है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
