जिनालय में पहुंचने के लिए आपको संयमी बनना होगा जैसे आचार्य श्री गए हैं आगम सागर महाराज
सागर
परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य आगम के ज्ञाता मुनिश्री 108 आगम सागर महाराज ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का नाम स्मरण करते हुए समझाया कि, जिनालय में पहुंचने के लिए आपको संयमी बनना होगा। जैसे आचार्य श्री गए हैं। और यदि आपको संसार में भटकना है तो मौज मस्ती करते रहिए। आपके लिए इस संसार में 84 लाख योनिया है, यहीं पर भटकते रहेगे।
जिनालय में जाने के लिए आपको जिन धर्म पर विश्वास करना होगा। पूज्य महाराज श्री बालक कांप्लेक्स में आयोजित धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे उन्होंने कहा कि जिसको सिद्धालय जाना है, उसे खुद को पुरुषार्थ करना होगा। अपने जीवन का लक्ष्य बनाईए थोड़ा-थोड़ा चलिए। तभी आप उसे रास्ते पर चल सकते हैं।







मुनि श्री ने कहा कि जेल में आयोजित होने जा रहे हैं विधान में आप सभी शामिल हो, 1000 कैदी वहां पर हो रहे विधान में शामिल होंगे। धर्म आराधना करेंगे। आचार्य श्री का जिक्र करते हुए कहा कि गुरुदेव की बड़ी विचारधारा थी कि, अहिंसक वस्त्रो का निर्माण हो, इसके लिए हथकरघा उद्योग ग्रामीण क्षेत्र से लेकर जेलों तक शुरू कराया है। इससे उन लोगों को रोजगार मिल रहा है। जिनका भविष्य जेल से छूटने के बाद अंधकार में था। लेकिन अब जब वह कार्य सीख कर जा रहे हैं, तो अपने घर पर भी यह कार्य कर सकेंगे। आत्मनिर्भर होकर अपने घर पर जाकर परिवार का पालन पोषण करेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
