भ्रष्टाचार आतंकवाद की जननी है निर्भय सागर महाराज
आगरा
वैज्ञानिक संत पाठशाला सम्वर्धक आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने कमला नगर के डी ब्लॉक में स्थित श्री महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में 17 फरवरी को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार आतंकवाद की जननी है। जिनवाणी सम्यकज्ञान की जननी है। परिश्रम सफलता की जननी है। नियम संयम साधुता की जननी है।
खुद की गलती को गलत मानने वाला सही आदमी होता है। सबकी सुनने और सलाह लेने वाला कभी आगे बढ़कर सफल नहीं हो सकता ।

यदि आगे बढ़कर सफल होना है तो अपने दिल की और अपने गुरु की सुनो बाकी लोगों से ना सलाह लो और सब की बातें एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दो। तप की भट्टी में तप कर जो निकलते हैं वे इंसान भगवान बनाकर निकलते हैं और जो इच्छा को जीत लेता है वही साधु बनकर भिक्षा के लिए निकलता है। अपराधी के साथ रहना और अपराध को सहन करना भी अपराध है। आचार्यश्री ने कहा व्यापार में फायदे का और परिवार में कायदे का ध्यान रखना चाहिए। आदमी बोलने का हक छीन सकता है मौन रहने का नहीं। बोलना अपराध हो सकता है मौन रहना अपराध नहीं हो सकता है । स्वयं को स्वयंभू के रास्ते पर चलने वाला व्यक्ति पहले देश को, फिर समाज को फिर परिवार को हमेशा स्वयं से आगे रखकर चलता है। बीते हुए समय से आने वाले समय को वर्तमान में बेहतर बनाने की कला जिसके अंदर है उसका केरियर हमेशा उज्जवल है। समय अच्छा और बुरा नहीं होता बल्कि हमारे द्वारा उस समय में किए गए अच्छे और बुरे कर्म से समय अच्छा और बुरा होता है मुसीबत में परिवार के सदस्य एक दूसरे से बचते हैं जिसमें पिता परिवार को जोड़ने वाला बिजली के मैन स्विच के समान और मां बिजली के मीटर के समान होती है। इस दौरान दोपहर 3:00 आचार्यश्री ससंघ का मंगल विहार कमलानगर डी ब्लॉक जैन मदिर से टूंडला जैन मंदिर के लिए हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
