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जो व्यक्ति मां-बाप और संरक्षक के कहे में नहीं चलता उसे पारिवारिक सुख मिल ही नहीं सकता सुधासागर महाराज 

धर्म

जो व्यक्ति मां-बाप और संरक्षक के कहे में नहीं चलता उसे पारिवारिक सुख मिल ही नहीं सकता सुधासागर महाराज 

 मुंगावली

जो व्यक्ति अपने मां बाप के अपने, संरक्षक के कहे में नहीं चलता उसे पारिवारिक सुख मिल ही नहीं सकता। वह पारिवारिक सुख से वंचित रह जाता है। ऐसा व्यक्ति औरों से प्रभावित होता है। उन्हें अपना हितैषी मानता है अपने ही घर वालों को हीन भावना से देखता है। ऐसे खोटे कर्म व्यक्ति को पतन की ओर ले जाते हैं। ऐसे लोगों का अंत अच्छा नहीं होता परिवार घर गृहस्थी बिगड़ जाती है। उसका जीवन बाहर वालो की दया पर आश्रित हो कर रह जाता है। पुण्य के उदय से अच्छा कुल परिवार मिला है तो मां बाप की उपेक्षा मत करो।उक्त धर्म उपदेश शहर के संत भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने व्यक्त किए 

 

 

 

 

 

मुनिश्री ने आगे कहा कि बाहरी आकर्षण में मत पड़ना।बाहरी आकर्षक में पड़ने वाले अपना जीवन व्यसनों में फंसकर खत्म कर लेते हैं और पूर्व भव के उपार्जित पुण्य को भी खत्म कर लेते हैं इस दुर्लभ पर्याय को समझें जाने और अपने जीवन में रोज नहीं तो हफ्ते में कम से कम एक अच्छा काम इंसानियत के लिए अवश्य करना प्रारंभ करें आपको बहुत सुकून मिलेगा। अपनी जिंदगी को ऐसा बनाओ कि हर व्यक्ति कहे कि मुझे इनसे मिलना है यदि तुम्हारी जिंदगी में प्रकाशित है आपका मन प्रकाश से भरा है हमारे ज्ञान को सुपर प्रकाशि कहा है हमारे पास संस्कार है हमारे पास गुण है हमारे पास सब कुछ है हमें अपने जीवन को सुपर प्रकाशि बनना है।Promotional poster with a man in a suit and Hindi quote about recognizing personal talents, plus contact numbers at the bottom left.Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.

 

 

 

 हमें अपने जीवन को सुगंधित करना है थोड़ा सा ज्ञान सीखें ज्ञान वह चीज है जो आप को अंजाने देश से भी निकाल कर ले आयेगा।हमें अपने देश को विकसित राष्ट्र में लाने के लिए संस्कारो को बनायें रखना होगा।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि सभी चाहते हैं हमारा देश भी विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आए। इसके लिए संस्कृति के साथ संस्कारों पर ध्यान देना होगा सिर्फ पैसा और भौतिक संसाधनों से हम विकसित राष्ट्र की श्रेणी में नहीं आ सकते। हमें दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाना होगी इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सब कुछ झोंकते हुए भी अपने संस्कारो को बनायें रखना होगा।

 

 

 

 नगर में परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगवश्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ भले तैरह वर्षों के बाद आये हों लेकिन पूरे अंचल से भक्तों के आने का सिलसिला जारी है। 

 

        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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