वीतरागी धर्म बड़े पुण्य से मिलता है आचार्य सुंदर सागर जी महाराज

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वीतरागी धर्म बड़े पुण्य से मिलता है आचार्य सुंदर सागर जी महाराज
बांसवाड़ा
आचार्य श्री 108 सुंदर सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में बताया अरे ज्ञानी तुम किसी तिर्यच जीव को देखकर बेचारा कहते हो मगर तुम यह सोचो कभी हम भी इसी तरह बेचारे थे गुरुदेव कहते हैं बड़े भाग्य से बड़े पुण्य से यह वीतरागी धर्म मिला है वीतराग दर्शन मिला है सुबह जब आंख खुलती है तो णमोकार मंत्र बोलते हैं वह रात को आंख बंद करते हैं .तो णमोकार मंत्र बोलते हैं सुबह मंदिर जाते हैं तो वीतराग भगवान मिल जाते हैं व कभी गुरु का समागम मिलता है तो जिनवाणी सुनने को मिल जाती है

 

 

इतना सब करने के बाद भी अगर भगवान आत्मा का बोध नहीं हुआ तो समझना वापस निरोध में जाने का वक्त आ गया है आचार्य कहते हैं यह मनुष्य जीवन हमें ऐसे ही नहीं मिला जो पूरा दिन तेरे मेरे करने में वह कषायो में राग द्वेष में निकाल दे इसे इष्टोपदेश सुनने में .लगाओगे तो एक दिन तुम भी इष्ट को प्राप्त कर लोगे।

 

 

समाज के प्रवक्ता महेंद्र कवालिया ने बताया आचार्य श्री सुन्दरसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में दिनांक 15/ 2/ 2024 गुरुवार को 1008 सुमतीनाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव की 14 वी वर्षगाँठ महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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