*अन्तर्मना उवाच* (14 फरवरी!)
*जिद़, गुस्सा, गलती, लालच और अपमान,,*
*नेताओं की तरह होते हैं..*
*जो दूसरा करे तो चुभते हैं,*
*परन्तु स्वयं करे तो एहसास तक नहीं होता..!*
इसलिए उन्हें मत चुनो जिनका धर्म और ईमान नहीं हो। *ऐसे लोगों को चुनकर लोकसभा और विधानसभा में मत भेजो, जो राजनीति में से नीति निकाल देना चाहते हैं।* जो बात तो अखंडता की करते हैं, लेकिन कार्य खंडन का करते हैं। जो भारतीय होकर भी मानसिक दृष्टि से विदेशी भाषा और संस्कृति की गुलाम है। *उन्हें अपने जन प्रतिनिधि के रूप में मत चुनिये* —
🔸 जो दुहाई तो राम, कृष्ण, बुद्ध और महावीर की देते हैं, पर समझते हैं यह सब वर्तमान संदर्भ में अप्रासंगिक हो गए हैं।
🔸 जो गरीबों के मसीहा बनते हैं, पर स्वयं विलासिता पूर्ण जीवन जीते हैं।
🔸 जो भाषण तो देश भक्ति का करते हैं, लेकिन जिनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं।
🔸 जो दल या पार्टी को देश से बड़ा समझते हैं।
🔸 जो भ्रष्टाचार को शिष्टाचार का जामा पहनाने को प्रयत्नशील हैं।
ऐसे लोगों को चुनना अपने हाथों से, अपने पैरों पर कुठाराघात करना है। *गलत व्यक्ति का समर्थन करना भ्रष्टाचार को प्राश्रय देना है।* हम गलत आदमी को नहीं चुनेंगे, गलत आदमी का समर्थन नहीं करेंगे। ऐसा संकल्प ही, विकृत और गंदी राजनीति के सुधार में कारण बन सकता है…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद
