आचार्यश्री वर्धमान सागर ससंघ सान्निध्य में केवलज्ञान और समवशरण सभा के हुए कार्यक्रम

धर्म

आचार्यश्री वर्धमान सागर ससंघ सान्निध्य में केवलज्ञान और समवशरण सभा के हुए कार्यक्रम।
ऋषभदेव। 
ऋषभदेव गुरुकुल धर्मार्थ ट्रस्ट पंच कल्याणक समिति द्वारा सकल दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से आयोजित श्रीमद आदिनाथ एवम् चौबीसी जिनेन्द्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के चौथे दिन केवल ज्ञान कल्याणकपर आयोजित धर्म सभा में वात्सल्य वारिधि राष्ट्र गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने वर्धमान सभागार में कहा कि तीर्थंकर भगवान को आहार की जरूरत नहीं होती है फिर भी तीर्थंकर भगवान आहार के माध्यम से भविष्य का संविधान बनाते हैं कि मुनिराज किस प्रकार आहार करेंगे वे किस विधि से आहार लेंगे। वीतरागता के तंत्र में कोई परिवर्तन नहीं होता है अतः सभी रत्नत्रय रूपी वीतरागता को प्राप्त करने के लिए सबको पुरुषार्थ करना चाहिए। 

सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र रत्न त्रय के अभाव में प्राणी संसार में परिभ्रमण कर रहे हैं। सबसे पहले 8 कर्मों का आश्रव रोकना होगा इसके लिए संवर तत्व अर्थात जिस प्रकार बांध बनाकर पानी को रोका जाता है उसी प्रकार कर्मों के आश्रव को तप और संयम रूपी बांध बनाकर कर्मों की निर्जरा तप संयम और साधु जीवन के माध्यम से करना होगी। उन्होंने कहा कि अंधकार को जिस प्रकार दूर करने के लिए दीपक के प्रकाश से अंधकार को दूर किया जाता है उसी प्रकार आपको मोह रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी दीपक के माध्यम से दूर करना होगा। इसके लिए संयमधारण कर निर्वाण को प्राप्त किया जा सकता है। नारी पर्याय से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है इसके उत्तर में आचार्यश्री ने कहा कि सम्यक दर्शन, ज्ञान चरित्र जो धर्म है उसका समीचीन पालन करके आप नारी पर्याय से छुटकारा पा सकते हैं । प्रवचन के दौरान एक श्रावक ने प्रश्न किया कि सर्वश्रेष्ठ गति कौन सी है तो आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य गति ही श्रेष्ठ है क्योंकि इससे आप संयम धारण करके मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। वर्ष 2024 को वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर का चातुर्मास किस नगर में होने संबंधी प्रश्न पर आचार्यश्री ने उत्तर देते हुए कहा कि चातुर्मास स्थापना की नियत तिथि को संघ जिस नगर में होगा वहा चातुर्मास स्थापित करेंगे। आचार्य के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने प्रवचन में बताया कि तीर्थंकर बालक किस प्रकार गर्भ में आते है,जन्म होता है,बड़े होने पर राज्याभिषेक के बाद दीक्षा लेकर तप कल्याणक के बाद ज्ञान कल्याणक मनाया जाकर कल मोक्ष कल्याणक मनाया जावेंगा।जिस प्रकार महामुनि श्री आदिनाथ को 12 माह के साधना उपवास के बाद आहार हुआ उसी प्रकार प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी को भी संयम अवस्था में 7 दिन उचित विधि से पडगाहन नही होने से आहार नही हुआ।वर्तमान साधु परंपरा आपकी देन हैं आपने जिनवाणी,जिनालय,जैन संस्कृति,श्रमण नग्न विहार आदि के लिए 1105 दिनों तक अनाज आहार का त्याग 18 करोड़ मंत्रो के जाप कर प्राणों को संकट में डाल कर धर्म की रक्षा की। अब समाज को उस ऋण का कुछ अंश चुकाने का अवसर मिला।     
श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के चौथे दिन विमान शुद्धि कलश यात्रा निकाली गई। संहितासूरि पंडित हंसमुख जैन धरियावद द्वारा मंदिर वेदी वास्तु व हवन का आयोजन किया गया। वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के मौजूदगी में केवलज्ञान संस्कार क्रिया, अधिवासना, मुखोद्घाटन, नयनोन्मिलन, सूरीमंत्र, गुणारोपण, केवल ज्ञान पूजा, हवन, पद्दोद्घाटन, समवसरण दर्शन व 46 दीप से आरती, दिव्य ध्वनि का आयोजन किया गया। इस दौरान हजारों जैन समाज के लोगों ने श्री ऋषभ देव महामुनि एवं आचार्य वर्धमान सागर महाराज के जयकारों से पांडाल को गूंजा दिया।वात्सल्य वारिधि आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य । आचार्यश्री वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन के पुण्यार्जक योगेश पोपट लाल यू एस ए एवम् जिनवाणी भेट काआरती वैभव, भावना ,वर्षा ,हंसा बेन ( सौधर्म इंद्र परिवार)पुण्यार्जक परिवारों द्वारा किए गए। महामुनि श्री आदिनाथ के आहार का सौभाग्य राजा श्रेयांस डा धर्मेंद्र किरीट कोठरी और राजा सोम जीवंधर रविकांत किकावत परिवार को मिला। आहार चर्या के समय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित हजारों श्रद्धालुओं ने आहार देख कर अनुमोदना की। आहार के बाद पंचाश्चर्य भी हुएश्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महा महोत्सव के तहत प्रतिष्ठाचार्य संहितासूरि हंसमुख जैन सुधीर शास्त्री मार्तंड के निर्देशन में प्रातः ध्यान व आशीर्वाद सभा, श्री जिनाभिषेक एवं नित्यार्जन का आयोजन किया गया। वर्धमान सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के मंचासीन होने के बाद आहार चर्या एवम् अन्य कार्यक्रम हुए।सांयकालीन आरती करने के सौभाग्यशाली परिवार के लोग वर्धमान सभागार पहुंचे जहां पर श्रीजी की महाआरती की गई। शास्त्र सभा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए15 फरवरी को प्रात होगा मोक्ष कल्याणक एवम तत संबंधी विभिन्न धार्मिक क्रियाएं , कलशारोहण, धवजारोहण,रथ यात्रा आदि कार्यक्रम होगे सफलता एवम धर्म प्रभावना के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को 4 मार्च 24 से पारसोला पंच कल्याणक हेतु मंगल विहार होगा इस बीच सीपुर में सहस्रकूट जिनालय का शिलान्यास आचार्य संघ सानिध्य में 19 फरवरी को होगाराजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी।

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