भगवान की भक्ति भाव से इस संसार में हर बाधा को दूर कर सकते हैं आदित्य सागर महाराज
कोटा
कोई जन्म से सुखी तो कोई जन्म से दुखी होता है। जन्म लेते ही कोई चांदी की चम्मच पाता है, तो किसी को पालना भी नहीं मिलता है। कोई जन्म के साथ ही करोड़पति तो कोई गरीबों के साए में आंख खोलता है। यह पूर्व जन्मों के कर्म ही होते हैं।
यह उद्गार पूज्य मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर रिद्धि सिद्धि नगर में कहीं महाराज श्री ने कहा कि हम संसार में ना खाली हाथ आते हैं, ना खाली हाथ जाते हैं। पिछले जन्म के कर्मों व संस्कार को हम लेकर आते हैं।
इस भव के कर्मों को लेकर जाते हैं। ऐसा ना होता तो सीता हरण, राम वनवास, सीता वियोग पूर्व जन्म के संस्कार लेकर ही मनुष्य
संसार में आता है। कुंडलिया मात्र अच्छा या बुरा बताती हैं। उन्हें यथार्थ करना या बदलने के लिए पुरुषार्थ करना होता है। भगवान की भक्ति करके इस संसार से हर बाधा को दूर कर सकते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी ,9929747312
