नव दीक्षित मुनि श्री 108 विशाल सागर जी महाराज का समाधि मरण उपरांत निकाला गया डोला

धर्म

नव दीक्षित मुनि श्री 108 विशाल सागर जी महाराज का समाधि मरण उपरांत निकाला गया डोला
टोंक राजस्थान
अनेक साधुओं की जन्म भूमि ,दीक्षा भूमि, समाधि भूमि टोंक में नव दीक्षित मुनि श्री 108विशाल सागर जी का 27 जुलाई को समाधि मरण होने से विमान यात्रा डोला दोपहर को निकाला गया। दिन रात मेरे स्वामी, में भावना यह भावु ।देहांत के समय मे तुमको न भूल जावू।मरण समय गुरु पाद मूल हो संत समूह रहे ,पंडित पंडित मरण हो ऐसा अवसर दो।इन सार गर्भित भावनाओ को बिरले ही भव्य जीव अपने जीवन मे चरितार्थ करते है ।पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर से वर्ष 2015 में दीक्षित क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी ने आचार्य श्री108 वर्धमान सागर जी से निवेदन कर 27 जुलाई को मुनि दीक्षा ग्रहण की नाम मुनि श्री108 विशाल सागर जी महाराज किया।

दीक्षा की कुछ अवधि बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के श्री मुख से अरिहंत सिद्ध सुनते हुए समाधि मरण हुआ क्षपक समाधिस्थ मुनि श्री विशाल सागर जी का डोला विमान यात्रा वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ माताजी संघ सानिध्य में निकाली गई। मुनि श्री के डोले के आगे कमंडल लेकर भूमि शुद्धि कंधे का सौभाग्य परिजनों को प्राप्त हुआ समाधिस्थल परिसर में मंत्रोचार से स्थल शुद्धि की गई। मुनि श्री की पूजन शांतिधारा और पंचामृत अभिषेक गृहस्थ अवस्था के पुत्रों श्री प्रवीण अंकेश एवं परिवार द्वारा किया गया। राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि जोबनेर राजस्थान की श्री सुरेश जी ने किशनगढ़ में क्षुल्लक दीक्षा वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सिद्ध हस्त कर कमलों से हुई आपका नाम क्षुल्लक 105श्री विशाल सागर जी किया गया आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से आपके गृहस्थ अवस्था की पत्नी ने वर्ष 2015 में आर्यिका दीक्षा लेकर श्री विचक्षण मति एवम् माता ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से वर्ष 2023 में दीक्षा लेकर आर्यिका श्री सुभगमति नाम करण होकर आपकी भी समाधि हो चुकी है
कामा नगर के प्रत्यक्ष दर्शी संजय बड़जात्या अनुसार टोंक की धरा पर उपस्थित जैन समुदाय कह उठा जय हो श्री वर्धमानसागर
टोंक की पावन धरा पर विराजमान वात्सल्य वारिधि परम पूज्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज जिनकी दूर दृष्टि आज टोंक की भूमि पर सभी ने अपने आंखों से देखी व कानों से सुनी। पंचम काल मे भी ऐसे अद्भुत और विरले संत विराजमान है जो आने वाले भविष्य को पहले ही जान लेते हैं। आज दिगंबर जैन अमीरगंज में सभी ने एक स्वर से कहा की जय हो आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज जो जीवंत चमत्कार के पुंज हैं वाक्य था क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी महाराज को मुनि दीक्षा देने का। जैन पत्रकारों की गोष्ठी शांति समागम के नाम से चल रही थी कि तभी आचार्य भगवान ने जान लिया कि एक संत निर्वाण को प्राप्त होने वाले हैं और आनन फानन में उन्होंने मुनि दीक्षा प्रदान कर मुनि श्री 108विशाल सागर महाराज नामकरण किया।चमत्कार तब हुआ जब दीक्षा बड़ी समता भाव के साथ संपन्न हुई उपस्थित जन समुदाय ने अपनी आंखों से केश लोंच करते हुए नवदीक्षार्थी महाराज को देखा और कोई भी यह नहीं कह सकता था कि आने वाले क्षण में ही उनकी समाधि हो जाएगी। दीक्षा के मात्र 15 मिनट पश्चात ही मुनि श्री 108 विशाल सागर महाराज समतापूर्वक समाधि मरण को प्राप्त हुए। धन्य है ऐसे चमत्कारी दिव्य संत जो आज इस कलयुग में ही विराजमान है।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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