वक्त और बदलते दौर के रिश्तों में.. खुद को बदलना ही सबसे बड़ी समझदारी है…! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

धर्म

वक्त और बदलते दौर के रिश्तों में.. खुद को बदलना ही सबसे बड़ी समझदारी है…! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

बांसवाड़ा 

 अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज बांसवाड़ा की मोहन कालोनी में  उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि जैसे पेड़ की टहनी पर बैठा पक्षी कभी टहनी टूटने से नहीं डरता, क्योंकि उसे विश्वास टहनी पर नहीं, अपने पंखों पर होता है। जीवन का यह कड़वा सत्य है कि लोग आपको तब तक ही याद करते हैं, जब तक आपकी साँसें और उनके स्वार्थ, दोनों साथ चल रहे होते हैं। स्वार्थ सिद्ध होते ही और साँसें रुकते ही, करीबी, अपने, सगे-संबंधी, रिश्तेदार और दोस्त —सब धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं। यह सत्य वैसा ही है जैसे तेल की एक बूंद पर लाखों टन पानी गिरने के बाद भी, पानी उस बूंद के अस्तित्व को मिटा नहीं पाता।

 

 

_अरे बाबू!_हम यह नहीं तय कर सकते कि कौन हमारा कितना साथ देगा, लेकिन हम हर परिस्थिति से बहुत कुछ सीख जरूर सकते हैं। अनुभव से सीखकर जीओगे, तो कभी अपनों के सामने लाचार नहीं बनोगे। हर जीवन में एक समय ऐसा आता है, जब मन स्वयं से कहता है — इस संसार में परमात्मा और धर्म के अलावा कोई भी स्थायी अपना नहीं है। इसलिए —जीवन के हर सत्य का सामना हिम्मत से करो..


जो है, सो है…!!! आज़ यह अंतर्मना अहिंसा संस्कार पदयात्रा परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ का भव्य मंगल विहार आज 4 अप्रेल 2026 शनिवार सुबह को 7.15 बजे श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मोहन कॉलोनी, बांसवाड़ा से श्री वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर, महालक्ष्मी चौक, बांसवाड़ा 1.6 किलोमीटर के लिए हुआ

 

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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