माता-पिता को अपने स्टेटस के अनुरूप बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए आदित्य सागर महाराज
रावतभाटा
परम पूज्य आचार्य गुरुवर विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 आदित्य सागर महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा की नीति के मार्ग पर चलना चाहिए।
उन्होंने जल को छानकर काम में लेने के लिए सभी को बताया महाराज श्री ने कहा कि हमेशा शास्त्र सम्मत बोलना चाहिए। पीयूष एवं उत्तम वाणी का प्रयोग करना चाहिए। छोटे एवं बड़ों को जीवन में संभल कर चलना चाहिए।





यदि हमें ठोकर लग जाती है तो इसका दोष पत्थर का नहीं है दोष हमारा है कि हम संभल कर नहीं चले। उन्होंने इस बात की भी सीख दी कि जो भी हमारे मन में आता है उसे तुरंत ना करें उसे करने से पूर्व सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने इस बात की प्रेरणा दी कि भावना वेश में निर्णय न लेकर लक्ष्य को निर्धारित करके निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कड़े शब्दों में जोर देते हुए अभिभावकों को सीख दी की और कहा कि जिस विद्यार्थी की जिसमें रुचि हो, उसे उसी में आगे बढ़ाना चाहिए। माता-पिता को अपने स्टेटस के अनुरूप बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
