अन्तर्मना उवाच* (12 फरवरी!)
जीने के लिये महत्वपूर्ण सूत्र —
1. अपनी प्रतिभा को समझो,*
2. *इच्छाओं पर कन्ट्रोल करो,
3. *मन की शान्ति और चेहरे की प्रसन्नता से समझौता मत करो।
जो खुद पर ध्यान देता है, दुनिया उस पर ध्यान देती है। जो कम से कम बोलता है, लोग उसको सुनना पसंद करते हैं। जो दूसरों को नालायक समझता है, वो कभी लायक नहीं बन पाता। जो दूसरों को मूर्ख समझता है, वो सबसे बड़ा मूर्ख है। सुख, शान्ति से जीने के हजारों मार्ग है, पर पड़ोसी से ज्यादा सुखी होने का कोई मार्ग नहीं है। बुद्धिमान वह नहीं जो अधिक पढ़ा-लिखा ज्ञानी हो। बुद्धिमान तो वह है जो कब, किससे, कहाँ, क्या, और कैसे बात करना है, इस कला में निपुण है, वही इंसान समझदार है।
स्वयं को सुधारने में इतने मस्त हो जाओ कि पड़ोसी, क्या कर रहा है और क्या बोल रहा है, इसकी भी सुध ना रहे।







वो भी क्या वक्त था, जब किसी को स्टेशन छोड़ने जाते थे, तो आँख नम हो जाती थी। अब तो शमशान में भी नही भीगती।जन्म और मृत्यु, अब महंगे हो गये हैं। सिजेरियन के बिना कोई आता नहीं और वेन्टीलेटर के बिना कोई जाता नहीं।कैसे हो पायेगी, अच्छे और बुरे इंसान की पहचान। अब दोनों ही नकली हो गये हैं, आंसू और मुस्कान। लोगों को सफाई देने में, अपना कीमती वक्त बर्बाद मत करो। क्योंकि लोग तो वही सुनते हैं, जो उन्हे सुनना है…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
