अहम का भाव ही व्यक्ति के जीवन पतन का कारण बनता है सुंदर सागर महाराज

धर्म

अहम का भाव ही व्यक्ति के जीवन पतन का कारण बनता है सुंदर सागर महाराज

बांसवाड़ा

आत्म तत्व को जानने और जीवन को बेहतर बनाने के लिए मनुष्य को चाहिए कि वह अज्ञानता वश उत्पन्न में और मेरे का झूठा भाव छोड़ दे।

 

 

जिससे कि वह परिष्कृत होकर स्वच्छ निर्मल मन वाला व्यक्ति बन सके। आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज ने रविवार को धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम का भाभी व्यक्ति के जीवन में पतन और नाश कारण बनता है।

 

 

यह मनुष्य जीवन हमें मिला है जो अनमोल है मनुष्य कामनाओं के कारण चिंतित और व्याकुल रहता है यही मुख्य कारण है कि वह प्रभु के स्वरूप का चिंतन मनन करते हुए भक्ति नहीं कर पता है। यह अपना है और यह पराया है इस प्रकार के भेदभाव से युक्त होकर किसी से मित्रता करता है। और किसी से शत्रुता। महाराज श्री ने कहा कि इन सबसे छुटकारा पाना है तो हमें आत्म तत्व को जानने के लिए भक्ति करनी चाहिए।

आत्मज्ञान प्राप्त करने से एक व्यक्ति सभी कर्मों से मुक्त हो जाता है। साथी वह जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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