क्षमा गलती का मरहम विश्वास का नहीं :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज.) में साधनारत गणिनी आर्यिका रत्न गुरूमां विज्ञाश्री माताजी के ससंघ सान्निध्य में शांति प्रभु के पादमूल में अभिषेक , शांतिधारा के पश्चात शांतिनाथ विधान करने का सौभाग्य शांतिलाल पवांलियाँ वाले निवाई सपरिवार ने प्राप्त किया। मण्डल पर 120 अर्घ्य चढाकर भगवान शांतिनाथ जी की आराधना की गई।
माताजी ने प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधन देते हुए कहां कि – रिश्तों की रस्सी कमजोर तब हो जाती है, जब इंसान गलतफहमी में पैदा होने वाले सवालों के जवाब भी खुद ही बना लेता है। क्षमा केवल गलती का मरहम हो सकता है, विश्वास तोड़ने का नहीं इसलिये जीवन में हम कोई गलती भले ही करे, पर किसी का विश्वास न तोड़े, क्योंकि माफ करना फिर भी सरल है पर भूलना व पुन: विश्वास करना असंभव है।


गुरुभक्त सरिता पाटनी किशनगढ़ एवं सुरेन्द्र पाटनी जयपुर, महेन्द्र गर्ग जयपुर वालों ने गुरूमाँ की आहारचर्या कराने का सौभाग्य प्राप्त किया। तत्पश्चात अशोक पहाड़ी वाले निवाई वालों ने निर्माणाधीन सहस्रकूट जिनालय का अवलोकन किया एवं मंगल कलश प्राप्त कर गुरूमाँ का आशीष प्राप्त किया। टोडारायसिंह जैन समाज के अध्यक्ष संत कुमार कासलीवाल ने गुरु माँ का मंगल आशीर्वाद एवं मंगल कलश प्राप्त किया ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
