धर्म के प्रति अनुराग भक्ति से आत्मा कर्मों से सुरक्षित रहती हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

ऋषभदेव केसरिया जी श्री आदिनाथ भगवान के अतिशय कारण प्रसिद्ध है ।मूल मंदिर में विवाद के कारण श्रावक समय पर दर्शन अभिषेक पूजन नहीं कर पाते थे इन परिस्थितियों को समझ कर तत्कालीन भट्टारक श्री यशकीर्ति जी ने पृथक से गुरुकुल बनवा कर जिनालय की स्थापना की ,ताकि जैन समाज के व्यक्ति समय की अनुकूलता अनुसार भगवान के दर्शन ,अभिषेक पूजन भक्ति निर्विकल्प कर सके बच्चो में धार्मिक संस्कार के लिए गुरुकुल प्रारंभ किया। गुरुकुल ट्रस्ट द्वारा गुरुकुल में 24 भगवान की प्रतिमा का पंचकल्याणक कराया जा रहा है ।
इसका क्या कारण है, इसका चिंतन जरूरी है भगवान की भक्ति ,दर्शन अभिषेक ,पूजन स्वाध्याय से पुण्य में वृद्धि होती है ।यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर जी ने ऋषभदेव गुरुकुल की धर्म सभा में प्रकट की ब्रह्मचारी गजूभैय्या,राजेश पंचोलिया ,योगेश गंगावत अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि आधुनिक साधनों टीवी मोबाइल पर भगवान के दर्शन करने से पुण्य की कम प्राप्ति होती है । मंदिर जाने का अगर आप विचार करते हैं ,मंदिर जाने को तैयार होते हैं, मंदिर जाने के लिए निकलते हैं, आधे रास्ते पहुंचते हैं ,मंदिर का शिखर कलश देखते हैं मंदिर जाकर दर्शन करते हैं मंदिर की परिक्रमा लगाते हैं इन समस्त प्रक्रिया में आपके बगैर तप उपवास के अनेक उपवास का फल मिलता है जैन मंदिरों से धर्म की प्रभावना होती है ।बड़े दुख की बात है कि व्यक्ति धन कमाने के लिए नगर परिवार छोड़कर दूर-दूर तक यहां तक की विदेश भी चले जाता है किंतु धर्म को कमाने के लिए घर के समीप नगर में मंदिर होने के बाद भी उसे मंदिर जाने का समय, भगवान की भक्ति करने का समय नहीं होता है।आचार्य श्री ने बहुत ही मार्मिक शब्दों में कहा कि जितना आप राग ,


प्रीति,प्रेम परिवार ,व्यापार और शरीर के प्रति करते हैं इतनी प्रीति ,भक्ति ,इतना प्रेम ,तन्मयता आप देव शास्त्र गुरु भगवान के प्रति करें तो आपके जीवन का उद्धार होगा।आचार्य श्री ने वर्तमान रोगों की उत्पत्ति का कारण बताया कि आपका खान-पान, विचारधारा, रहन-सहन दूषित हो गया है इस कारण आपका शरीर भी सुरक्षित नहीं है। इसलिए हॉस्पिटल बढ़ते जा रहे हैं । संत समागम सानिध्य से धर्म के साथ पुण्य में भी वृद्धि होती है।
हमारे दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी ने यहां चातुर्मास भी किया है।आने वाले दिनों में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होगी जिसमें पाषाण को भगवान बनाने की मांगलिक प्रक्रिया विधान पूर्वक होगी। पंच कल्याणक में भगवान के गर्भ ,जन्म, तप,ज्ञान और मोक्ष कल्याण के नाटककीय दृश्य के माध्यम से धर्म का संदेश दिया जावेगा ।
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा कार्यक्रम देखने से परिणाम में विशुद्धता और निर्मलता आती है यह नाटक प्रदर्शनी नहीं है इन कार्यक्रमों में दिन भर जो भी धार्मिक कार्यक्रम होते हैं उसमें शामिल होना चाहिए।
आज प्राणी अनेक भवों में अनेक गतियां में दुख उठा रहा है ।चाहे नरक गति हो ,चाहे तिर्यंच गति हो,यहां तक कि मनुष्य गति में भी आप सुखी नहीं है ।आचार्य श्री ने सूत्र बताए कि आप धर्म के प्रति अनुराग रख कर धर्म को अपनाएंगे इससे आत्मा सुरक्षित रहे की और आप सुखी रहोगे। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
