मनुष्य जीवन चंदन का बाग है विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज.) की पावन धरा पर विराजमान गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ने प्रवचन देते हुए कहां कि – मनुष्य जीवन चन्दन का बाग है । मनुष्य का शरीर और हमारा एक-एक श्वास चन्दन के वृक्ष हैं, पर अज्ञानता वश हम इन चन्दन को कोयले में तब्दील कर रहे हैं।
लोगों के साथ बैर, द्वेष, क्रोध, लालच, ईर्ष्या, मनमुटाव को लेकर खिंचातान आदि की अग्नि में हम इस जीवन रूपी चन्दन को जला रहे हैं। जब अंत में श्वास रूपी चन्दन के पेड़ कम रह जायेंगे तब एहसास होगा कि व्यर्थ ही अनमोल चन्दन को इन तुच्छ कारणों से हम दो कौडी के कोयले में बदल रहे थे, पर अभी भी देर नहीं हुई है हमारे पास जो भी चन्दन के पेड़ बचे है उन्हीं से नए पेड़ बन सकते हैं। आपसी प्रेम, सहायता, सौहार्द, शांति, भाईचारा और विश्वास के द्वारा अभी भी जीवन संवारा जा सकता है।

गुरुमाँ की आहारचर्या कराने का परम सौभाग्य चाकसू महिला मण्डल को प्राप्त हुआ। 
विज्ञातीर्थ क्षेत्र पर समिति के द्वारा गुरुमाँ का 30 वाँ दीक्षा दिवस भव्यता के साथ 25 फरवरी को मनाया जायेगा। जिसमें विशेषत: अखिल भारतवर्षीय महिला परिषद का गठन होने जा रहा है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
