रिद्धि-सिद्धि पाना बहुत सरल है लेकिन इन्हें संभालना बहुत कठिन सुधा सागर महाराज

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रिद्धि-सिद्धि पाना बहुत सरल है लेकिन इन्हें संभालना बहुत कठिन सुधा सागर महाराज

आगरा
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव 108 श्री सुधासगर ज महाराज ने प्रवचन मे कहा की राष्ट्र निर्माण में जैनियों का हमेशा योगदान रहा है और शक्ति अनुसार कर भी रहा है।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि अपराध यदि सबसे कम प्रतिशत में देखे जाएं तो सबसे कम अपराध जैन समुदाय में होते हैं। जैन समुदाय के व्यक्ति राष्ट्र की उन्नति में भी सहायक रहते हैं। हम यदि
सारी जातियों में देख लें टैक्स कौन देता है। तो वह जैन समाज है। हम राजनैतिक चेतना की कमी के संदर्भ दोपहर में चर्चा करेंगे

उन्होंने जैन समुदाय पर आ रहे संकट पर कड़ी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जैन समाज पर जो संकट आ रहें हैं उसका कारण आप धर्मात्मा है, सज्जन हैं, आपकी सरलता ही आपकी दुश्मन है देखा जाए तो आज दशो दिशाओ से आपको ऊपर संकट है। आगे जो षड़यत्र चल रहे हैं उसमें ऊपर से जैविक अस्त्र छोड़े जायेंगे जैविक युद्ध में सब जो का तोय रहेगा जीव मात्र मर जायेंगा यही है भौतिकता के दुष्परिणाम।

 

 

 

 

आज की महती आवश्यकता पर जोर देते हुए महाराज श्री ने कहा कि आज सबसे बड़ी जरूरत है अपने आप को सुरक्षित रखना ज्यादा पाने की कोशिश मत करो । जो मिला है उसमें सन्तोष करना है ज्यादा कमाने वाले होते हैं उनका दिन निकालना मुश्किल होता है।

 

 

रिद्धि-सिद्धि पाना बहुत सरल है लेकिन इन्हें संभालना बहुत कठिन है मंत्र और तांत्रिक लोगो को पागल होते देखा है। मंत्र तंत्र वाले को देखा है जो उनको संभाल नहीं पाते क्या स्थिति बनती है इसलिए कहा गया है कि मंत्र तंत्र ना पड़े।

 

महाराज श्री ने श्रीरामचंद्र जी का उदाहरण देते हुए कहा कि
श्री रामचंद्र जी यदि थोड़ा सा नीचे उतर आते पिता जी की आज्ञा की ओर ध्यान ना देते सारी प्रजा चाहती थी परिवार चाहता था थोड़ा सा नीचे उतर आते क्या फर्क पड़ता सब ही तो चाहते थे न्याय नीति भी यही तो कहतीं थी लेकिन नहीं श्री रामचन्द्र जी संकट पर संकट झेलते रहे और अपने धर्म पथ का जगत के लिए आदर्श बन गये।.संकट वाले अच्छे व्यक्ति-चारो तरफ से दुखी हो संकट आ रहे हैं वो अच्छा आदमी जो सब तरफ से संसारीक सुखो से सुखी सब तरफ से सुखी हो को व्यक्ति सुखी हो कोई जरूरी नहीं वो अच्छा आदमी है जिस व्यक्ति पर सब तरफ से दुख संकट आये वो व्यक्ति अच्छा आदमी है। उस व्यक्ति पर परिवार,समाज व रुपये संबंधी सब तरफ से दुखी हो वह व्यक्ति अच्छा आदमी हैं। आज के युग जो वैभव संपन्न सुखी है अच्छे लोगों को विघ्न क्यों आते हैं बुरे लोग तो संकट में ही है सारे लोग अच्छे लोगों को ही देखते हैं जिनके पास सुख है उन पर यदि दुख आये तो सब उनको देखते हैं कि इस पर संकट क्यों आये। चौखे लोगों पर ही संकट आते हैं इस दुनिया में दुखी व्यक्ति ही महान हो सकता है, सब तरफ से सुखी होने वाला खोटा व्यक्ति हो सकता है। सामने उदाहरण है रावण

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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