वर्तमान में मनुष्य अपनी पहचान खोता जा रहा है प्रज्ञासागर महाराज

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वर्तमान में मनुष्य अपनी पहचान खोता जा रहा है प्रज्ञासागर महाराज
कोटा
तलवंडी दिगंबर जैन मंदिर में मंगल प्रवचन देते हुए तपोंभूमि प्रणेता पर्यावरण संरक्षक आचार्य श्री 108
प्रज्ञासागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि वर्तमान में मनुष्य अपनी पहचान खोता जा रहा है। पहले पुत्र अपने नाम से पहले पिता का नाम जोड़कर सम्मान प्रदर्शित करता था।

 

महाराज श्री ने श्रीमान शब्द का अर्थ समझाया और बताया कि श्रीमान शब्द का अर्थ भगवान के 1008 नाम में सबसे पहला नाम श्री है।

जिसे पिता के नाम के साथ जोड़ा जाता है। मकर संक्रांति का विशेष महत्व बताते हुए कहा कि भरत चक्रवर्ती ने सर्वप्रथम मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव में जिनबिंबो का साक्षात दर्शन किया था। मकर संक्रांति के विषय में कहा कि आज के दिन सूर्य धरती के सबसे निकट होता है।

 

उन्होंने कहा नकल में अकल होनी चाहिए। नकल करना है तो भगवान की या गुरु की करना ताकि तुम्हारी नकल सकल और निकल परमात्मा बन सके। यदि कल का मतलब शरीर है तो आज का मतलब आत्मा है। इसलिए मैं कहता हूं जो आज में जी रहा है वह आत्मा है मैं और जो कल में जी रहा है वह शरीर में जी रहा है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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