आर्यिका 105 सुदर्शनमति माताजी का देवलोक गमन
गाजीपुर
परम पूज्य मुनिश्री 108 दयासागर महाराज की परम शिष्या आर्यिका 105 सुदर्शन मति माता जी का समाधि मरण श्री प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर पटपड़ गांव में 1 फरवरी 2024 को रात्रि 10 :00 पर ॐ नमः सिद्देभ्या का जाप करते हुए परम पूज्य आचार्य श्री 108 अनेकांत सागर महाराज जी ससंघ सानिध्य में हुआ। जीवन का अंतिम लक्ष्य यही होना चाहिए अंत समय में प्रभु नाम स्मरण में आए और सलेखना पूर्वक समाधिमरण हो और वो भी आचार्य भगवान की सन्निधि में हो।वैसा ही माताजी का हुआ। धन्य है इनकी साधना
पूज्य माताजी की डोला यात्रा प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर पटपड़गंज गांव से प्रात 10:00 बजे गाजीपुर समाधिस्थल लाया जहा उनकी देह पंचतत्व में विलीन हो गई।
एक परिचय माताजी का। 
इनका ग्रहस्थ अवस्था का नाम बाल ब्रह्मचारी सरोज दीदी रहा इनका जन्म छिंदवाडा मध्यप्रदेश में हुआ। और यह पिता श्री कस्तूरचंद जी माता श्रीमती कमला देवी बगिया में पलकर बढ़ी हुई।

इनका जन्म दिनांक 17 मार्च 1958 को हुआ। एवम लौकिक शिक्षा मैट्रिक तक करने के बाद संसार से विरक्ति का भाव लिए इन्होंने आर्यिका दीक्षा ज्येष्ठ कृष्णा पंचमी 9 मई सन 1985 सलूंबर मुनि श्री दयासागर जी महाराज से सलूंबर में ली और नामकरण हुआ आर्यिका105 सुदर्शनमति माताजी उस दिन आर्यिका श्री सुभूषण मति जी एवम क्षुल्लक श्री उदार सागर जी की भी दीक्षा हुई। राजेश पंचोलिया से प्राप्त संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
