मुनि श्री प्रणित सागर जी ने किए केश्लोचन

धर्म

मुनि श्री प्रणित सागर जी ने किए केश्लोचनइंदौर वैशाली नगर आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रणित सागर जी एवम मुनि श्री निर्मोह सागर जी मार्च 2024 को होने वाले पंच कल्याणक के लिए,दीक्षा गुरु की चरण वंदना के लिए इंदौर 13 वर्षो बाद पधारे हैं सुभाष पाटनी ,देवेंद्रछाबड़ा, राजेश पंचोलिया ,नितिन अनुसार मुनि श्री प्रणित सागर जी ने 28 जनवरी को मंदिर में केशलोचन किए ।     

केश लोचन के बारे में मुनि श्री निर्मोह सागर जी ने चर्चा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर साधु को 2 माह से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है । केश लोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है केश लोचन की प्रक्रिया में महाराज श्री ने बताया कि केश्लोचन करते समय केवल राख का उपयोग किया जाता है मुनि श्री ने बताया कि जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। बाल हाथों से इसलिए उखाड़े जाते हैं कि बालों को कटिंग करने के लिए सेविंग कराने के लिए अन्य द्रव्य की आवश्यकता होती है जैन साधु अपरिग्रही होते हैं। इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं बाल सौंदर्य का प्रतीक हैं इससे राग और आकर्षण होता है। केश लोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केश लोचन के समय तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं उस दिन उपवास करते हैं ।केश लोचन देखकर अनुमोदना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है कर्मों की निर्जरा होती है। इस अवसर पर अनेक महिलाओ ने वैराग्य पूर्ण भजन गा कर केशलोचन की तपस्या की अनुमोदना की।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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