मुनिश्री सुधा सागर महाराज सानिध्य में मनाया गया आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का दीक्षा दिवस गुरु को जो देख लेते हैं वह धन्य नहीं होता जो गुरु को देख लेता है वह धन्य हो जाता है मुनि श्री
राघौगढ़
पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर महाराज संघ सानिध्य में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का 58 व दीक्षा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर महाराज श्री सुधासागर महाराज ने गुरु के प्रति भाव प्रकट करते हुए कहा कि जीवन में गुरु को जो देख लेते हैं, वो धन्य नहीं होता, जो गुरु को देख लेता है वह धन्य हो जाता।
उन्होंने कहा कि गुरु को जो देख लेते हैं, वो धन्य नहीं होता, जो गुरु को देख लेता है वह धन्य हो जाता गुरु जब किसी को आशीर्वाद देते हैं, वह उतना महत्वपूर्ण नहीं होता है, जो भक्त ले लेता है वो अतिशयकारी और चमत्कारी होता है। गुरुओं की कृपा जिन पर होती है उनका कल्याण होगा, यह नहीं कह सकते हैं लेकिन जिनकी श्रद्धा गुरुओं पर होती है, उनका कल्याण निश्चित है।

शगुन जो होता है वह आकृति से, नेचर से, प्रभाव से होता है
उन्होंने कहा कि शगुन जो होता है वह आकृति से, नेचर से प्रभाव से होता है राजा कितना भी निकृष्ट हो लेकिन ज्योतिष शास्त्रों में लिखा है राजा जब राजभेष में है, तब वह मांगलिक है अर्धचक्रवती नरक जाता है फिर भी उसकों मंगल में लिया शेर गुणों के कारण मांगलिक होता है,





आचरण के कारण नहीं दुर्घटनाएं घटती है लेकिन उसे कानून का समर्थन नहीं मिलना चाहिए। अंतर्जातीय विवाह होते आये है लेकिन समाज व परिवार के द्वारा समर्थन मिलना यह सबसे बड़ा पाप और अपराध है।
परिवार यह कहता है कि तुम्हें करना है तो कर लो, मेरा समर्थन नहीं होगा, लो अपना हिस्सा संभालो, तुम्हारा और हमारा कोई संबंध नहीं रहेगा, यदि ऐसा मां-बाप और परिवार वाले कर लेते हैं तो उनको पुण्य बंध होगा कि एक दिन उनके कुल में ऐसे बेटा पैदा होंगे, जो कभी इस प्रकार की बेइज्जती नहीं कराएंगे।
इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की मंगल आरती का सौभाग्य अशोक नगर दिगंबर जैन समाज को प्राप्त हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
