दूसरों को सुखी देखकर सुख मानना ही सच्ची मानवता है – आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुंसी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ , गुंसी (राज.) में साधनारत आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के ससंघ सान्निध्य में जन्मदिन पर आज की शांतिधारा कराने का सौभाग्य गुरु भक्त सुरेश जोड़ला सावर वालों ने प्राप्त किया । मालवीय नगर जयपुर की समाज ने पूज्य माताजी की आहारचर्या कराने का सौभाग्य प्राप्त किया ।
प्रातःकालीन बेला में स्वाध्याय के दौरान गुरुभक्त विजय गंगवाल चाकसू ने धर्म का सदुपदेश प्राप्त किया । माताजी ने कहा कि – कभी – कभी हम अपने सुख के लिए दूसरों को दुःखी कर देते है और उसका सुख छीनने का प्रयास करते हैं । क्या यह प्रवृत्ति मानवता की परिधि में आती है ? जीवन में ऐसी स्थितियां एवं घटनाएं होना सामान्य बात है ।




यह नहीं सोचा जा रहा कि ऐसी घटनाओं और प्रवृत्तियों के बढ़ने से क्या हम सब सुरक्षित रह पायेंगे । जब बलवान निर्बल को दबाएगा तो अत्याचार बढ़ेगा । हम वास्तविक रूप से तभी सुखी होंगे जब हमारा पड़ौसी सुखी रहेगा यह सिद्धांत की बात है ।
आगामी 14 जनवरी मकर सक्रांति के शुभ अवसर पर गुरु माँ के विशेष प्रवचन का लाभ सभी जैन एवं जैनेत्तर समाज को मिलने जा रहा है ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
