क्षमा वीरों का आभूषण है प्रज्ञासागर महाराज

धर्म

क्षमा वीरों का आभूषण है प्रज्ञासागर महाराज
झालरापाटन।
दिगंबर जैन समाज के दस लक्षण पर्व रविवार को उत्तम क्षमा धर्म के साथ शुरू हुआ। जैन मंदिरों में सुबह से ही अभिषेक करने वाले श्रावको की भीड़ रही। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, चंद्रप्रभ मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, सांवला जी मंदिर, आदिनाथ मंदिर, नेमी नगर लालबाग स्थित सीमधर जिनालय, कल्पतरु पार्श्वनाथ नसिया, अतिशय क्षेत्र जूनी नसिया में सुबह से ही शांति धारा और अभिषेक के साथ उत्तम क्षमा की पूजन हुई। शांतिनाथ बाड़ा में तपोभूमि प्रणेता एवं पर्यावरण संरक्षण आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज के सानिध्य में विधानाचार्य राजकुमार जैन बैंक वाला ने संगीतकार टीकमगढ़ निवासी पदमचंद जैन की मधुर स्वर लहरियों के साथ पूजन कराई। जिसमें  भक्ति भाव के साथ सोधर्म इंद्र बने रानी जैन नेमीचंद जैन एलआईसी वाला के साथ अन्य पुरुष एवं महिलाओं ने पूजन की। इंदौर निवासी प्रखर जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।

 

 

समाज के यशोवर्धन बाकलीवाल ने बताया कि कार्यक्रम के तहत शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर में दोपहर 2:30 बजे हेमश्री माताजी के सानिध्य में तत्वार्थ सूत्र, शाम 6:30 बजे प्रतिक्रमण और 7 बजे से आनंद यात्रा हुई। विधानाचार्य ने बताया कि 10 लक्षण पर्व सांप्रदायिक विशेष का नहीं है यह सबका है। क्योंकि यह सांप्रदायिक भावनाओं पर आधारित नहीं है। इसका आधार सार्वजनिक है जिसमें विकारी भावों का परित्याग एवं उदात भावो को ग्रहण किया जाना ही इसका आधार है। यह पर्व मात्र जैनियों का ही नहीं जन-जन का पर्व है। जो पंचमी से 14 तक मनाया जाता है। जिसमें आत्मा से 10 प्रकार के सद्भाव के विकास से संबंधित होने से इसे 10 लक्षण पर्व कहा जाता है। क्षमा शब्द मानवीय जीवन के आधारशिला है।

इस बेला में तपोभूमि प्रणेता पर्यावरण संरक्षक आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने अपने धर्म प्रवचन में कहा कि जैन धर्म में पर्यूषण पर्व का एक अलग ही महत्व है, इस पर्व को सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, इसलिए पर्यूषण पर्व को महापर्व भी कहा जाता है, जैन धर्म में यह पर्व 10 दिन तक मनाया जाता है, जैनियों द्वारा इसे 10 लक्षण पर्व के रूप में भी मनाया जाता है।

 

 

 

 

 

पर्यूषण पर्व भगवान महावीर स्वामी के मूल सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म और जियो और जीने दो की राह पर चलना सिखाता है, साथ ही मोक्ष का द्वार भी खोलता है, 10 दिन तक जैन समाज के लोग अलग-अलग नियम और कर्म करते हैं जिससे उन्हें सभी पापों से मुक्ति मिलती है। 10 लक्षण पर्व के दिनों में किया गया त्याग

 

 

 

और उपासना हमें जीवन की सच्ची राह दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है , क्षमा बराबर तप नहीं , क्षमा धर्म का आधार होता है। क्रोध सभी के लिए अहितकारी होता है और क्षमा सदा सर्वत्र सभी के लिए हितकारी होती है। हर धर्म में क्षमा का महत्व है।

 

नलिन जैन लुहाड़िया से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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