चिंता एवं चाहत को छोड़कर की गई साधना ही सुखदायक होती है ऐलक श्री विवेकानंद सागर महाराज
नरयावली
पूज्य मुनिश्री 108अजित सागर महाराज संघ सहित नरयावली में विराजमान है।
वही अपने मंगल प्रवचन में ऐलक विवेकानंद सागर महाराज ने साधना करने पर जोर दिया और साधना का महत्व बताया उन्होंने कहा कि जीवन में अगर उन्नति करनी है तो साधनों से नहीं साधना से होती है।





उन्होंने आगे कहा कि साधनों के द्वारा शरीर सुरक्षित हो सकता है लेकिन आत्मा और मन की सुरक्षा साधना से ही होती है। चिंता एवं चाहत को छोड़कर की गई साधना ही ही सुखदायक होती है। महाराज श्री ने इच्छाओं पर नियंत्रण ही श्रेष्ठतम बताया। उन्होंने पथ पर अग्रसर होने के लिए अभक्ष्य का भक्षण करने एवम असत्य का त्याग करने को कहा। अपनी आत्मा की उन्नति के लिए आवश्यकता के लिए जीवन जीना हैआसक्ति का जीवन नहीं जीना है। हम अपनी जीवन शैली आवश्यकता पर केंद्रित करें। और आसक्ति का जीवन छोड़कर ढंग का जीवन जिए, ढोंग का जीवन नहीं। तभी मनुष्य जीवन सार्थक हो सकता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
