भक्ति में चमत्कारी शक्ति होती है :- आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुंसी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ , गुंसी (राज.) की पावन धरा पर विराजमान गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने श्रद्धालुओं को उपदेश देते हुए कहा कि – भक्ति भक्त को भगवान बना देती है ।
भक्ति क्रियाओं में नहीं भावों में भी होना चाहिये। हम क्रिया से अभिषेक , पूजन तो करते हैं परंतु भावों का पता नहीं चलता । पानी में जैसे शक्कर मिल जाती है तो मिठास आती है । वैसे ही भक्ति में श्रद्धा रूपी शक्कर मिल जाये तो मिठास रूपी चमत्कारी शक्ति प्रदर्शित होने लगती है ।





श्री शांतिनाथ चैत्यालय में आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य अरविंद जी ककोड़ , हितेश छाबड़ा एवं शैलेन्द्र संघी निवाई ने प्राप्त किया । चतुर्दशी पर्व के अवसर पर माताजी ने रस परित्याग नामक तप धारण कर निरन्तराय आहार ग्रहण किये। उनकी त्याग – तपस्या को देखकर श्रावकगण लाभान्वित एवं प्रभावित होकर अपने मोक्षमार्ग को प्रशस्त कर रहे हैं ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
