अशांत मन सूखे तालाब की तरह है विहसंत सागर महाराज
ग्वालियर
परम पूज्य उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर महाराज ने अपना मंगल उद्बोधन मन की शांति पर दिया
उन्होंने मन की शांति को जीवन की सबसे बड़ी दौलत बताया महाराज श्री ने इस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शांति जीवन की सबसे बड़ी दौलत होती है वह समृद्धि व्यर्थ होती है जिसमें शांति का अमृत मान ना हो मां की शांति का क्या मूल्य है यह किसी समृद्धि व्यक्ति इसको जाकर पूछे।



दिन की शुरुआत में ऐसा लगता है कि जिंदगी में पैसा जरूरी है पर रात सोते समय लगता है कि जिंदगी में मां की शांति जरूरी है। महाराज श्री ने कहा कि अशांत मन सूखे तालाब की तरह है। अपने मन को प्रसन्न रखें उसने प्रेम का पानी डालते रहिए ताकि यह हरा भरा बना रहे। सफलता चाहिए तो जो पसंद है उसे हासिल करिए। शांति चाहिए तो जो हाथी है उसे पसंद करना शुरू कर दीजिए। पूज्य महाराज श्री शिवपुरी लिंक रोड स्थित आईपीएस कॉलेज में धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे।
25 फरवरी को महाराज श्री का दीक्षा दिवस एवं नवीन हॉस्पिटल का शिलान्यास कार्यक्रम होगा
रविवार को दोपहर 1:00 बजे नया बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर में एक बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें 25 फरवरी को उपाध्यक्ष श्री के 13वीं दीक्षा दिवस कार्यक्रम एवं नवीन हॉस्पिटल के शिलान्यास कार्यक्रम के लेकर चर्चा की जाएगी इस बैठक में समितियां के गठन तथा अन्य तैयारियां पर चर्चा होगी। उपाध्यक्ष श्री का रविवार की सुबह नया बाजार जैन मंदिर में प्रवेश होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
