जो माता-पिता अपने बच्चों को पाठशाला भेजते हैं उनके बच्चे जीवन में कभी भी अपने परिवार को दुखी नहीं होने देंगे पूर्णमति माताजी
उज्जैन
स्वर कोकिला पूर्णमति माता जी द्वारा कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान के सातवें दिन संस्कार के विषय पर बोलते हुए कहा कि बच्चों को भौतिक शिक्षा से बड़े-बड़े पैकेज वाली नौकरियां व आर्थिक सुविधा तो मिल जाती है। लेकिन संस्कार के बिना वह सुविधा किसी काम की नहीं है।
माताजी ने आगे बोलते हुए कहा कि रुपयों के द्वारा हम कार खरीद सकते हैं लेकिन संस्कार नहीं खरीदे जा सकते। उन्होंने जोर देते हुए अपने उद्बोधन में यदि संस्कार लेना है तो पाठशाला जाने पर जोर दिया। उन्होंने माता-पिता को पाठशाला भेजने की जवाबदारी है। जो भी माता-पिता अपने बच्चों को पाठशाला भेजते हैं उनके बच्चे जीवन में कभी भी अपने परिवार को दुखी नहीं होने देंगे।
युवाओं को आधुनिक तकनीक का सदुपयोग करने की बात माताजी ने कही
पूज्य माताजी ने अपने उद्बोधन में युवाओं को आधुनिक तकनीक का सदुपयोग करने का संदेश दिया इस पर बोलते हुए माताजी ने कहा कि वर्तमान का युग तकनीक का युग है। युवा वर्ग का इसके प्रति लगाव होना स्वाभाविक हो जाता है। यदि परिजन उन्हें रोकेंगे टोकेगे तो भटकाव बढ़ेगा। ऐसा करने के लिए युवाओं को प्रेरित करे कि वे इन तकनीकों का सदुपयोग करें। वेट कम समय में ज्यादा लोगों से जुड़ सकते हैं। उनके अनुभव का लाभ उठाएं, उनसे सीखे, इसीलिए परिजनों का दायित्व बढ़ जाता है, वे युवाओं के मित्र भी हैं, और सखा भी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
