मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ सानिध्य में श्रेयांसनाथ विधान संपन्न आचार्य श्री विद्यासागर महाराज चलते-फिरते तीर्थ हैं विमल सागर महाराज

धर्म

मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ सानिध्य में श्रेयांसनाथ विधान संपन्न आचार्य श्री विद्यासागर महाराज चलते-फिरते तीर्थ हैं विमल सागर महाराज
बांसवाड़ा
पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ सानिध्य में खांदू कॉलोनी स्थित श्रेयांश नाथ दिगंबर जैन मंदिर में श्रेयांशनाथ महामंडल विधान संपन्न हुआ।

 

 

 

यह महामंडल विधान पूज्य मुनि संघ सानिध्य एवं पंडित श्री प्रांशु शास्त्री के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। वही आसपास से बड़ोदिया आंजना के समाज जन ने अपने नगर में आगमन हेतु महाराज श्री के चरणों में निवेदन किया,श्रीफल अर्पित किया एवं मंगल आशीर्वाद लिया।

पूज्य महाराज श्री विमल सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस संसार में कुछ भी कर नहीं है, उन्होंने कहा कि तीर्थ में रहने का जिसको सौभाग्य मिलता है वह पुण्यशाली होता है। जिसे तिरा जाए वह तीर्थ होते हैं। जो तीर्थ पर भक्ति पूजा आराधना करता है वह तर जाता है।

 

पूज्य महाराज श्री ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को चलते-फिरते तीर्थ कहते हुए कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज चलते-फिरते तीर्थ हैं। मे विश्व की सभी वस्तुओं का वर्णन होता है।

 

इस अवसर पर मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि पूजा भक्ति एक अमृत रस है। उन्होंने भरत चक्रवर्ती के एक दृष्टांत को बताते हुए कहा कि जब भरत चक्रवर्ती पूजन करते थे, तो द्रव्य के पहाड़ बन जाते थे, भक्ति से शरीर, मन, आत्मा, हृदय शुद्ध हो जाते हैं। और समाज देश परिवार शुद्ध होता है। मोक्ष की द्वार का ताला भक्ति रूपी चाबी से खोला जाता है। भक्ति पापी के मन को पवित्र करती है। तलीनता से भक्ति करने से अतिशय चमत्कार होते हैं। भक्ति से आनंद गुप्ता और सफलता की प्राप्ति होती है। भक्ति से ऊर्जा मिलती है। आप ऐसी भावना करें।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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