आचार्य श्री विद्यासागर महाराज 77 वर्ष की उम्र में अनवरत 270 किलोमीटर का पद बिहार कर चंद्र गिरी तीर्थ पर मंगल आगमन हुआ
डोंगरगढ़
विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का चंद्र गिरी तीर्थ डोंगरगढ़ पर सोमवार की संध्या बेला में मंगल आगमन हुआ।सचमुच यह अपने आप में एक तप साधना ही कही जाएगी 76 वर्ष की उम्र में एक समय ही आहार लेकर अनवरत 270 किलोमीटर का पद विहार किया।
पूज्य श्री का प्रातः बेला में जब डोंगरगढ़ की धरा पर मंगल आगमन हुआ तो समाज जनों ने मंगल आगवानी में पलक पावडे बिछा दिए। जगह जगह गुरुदेव का पद प्रक्षालन किया गया। वह अपने मकानों के सामने आकर्षक रंगोली सजाई गई।

पूज्य गुरुदेव के संध्या बेला में चंद्र गिरी तीर्थ पर मंगल आगमन हुआ पूज्य गुरुदेव के प्रथम बार चरण क्षेत्र पर वर्ष 2011 में ग्रीष्मकाल के समय हुआ था तब से आज मैं इस क्षेत्र पर अनेक कार्य हो चुके हैं और कायाकल्प हो रहा है। इस पावन तीर्थ पर भव्य प्राचीन प्रतिमा विराजित है।

पूज्य गुरुदेव तो स्व पर कल्याण की भावना से निहित है, शिक्षा का सर्वांगीण विकास वह नैतिक शिक्षा बच्चों को मिले इस हेतु गुरुदेव की प्रेरणा से यहां पर कक्षा 1 से पांचवी तक का स्कूल भी संचालित हो रहा है। साथ ही अहिंसा के क्षेत्र में भी गुरुदेव के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। यहां पर हथकरघा केंद्र की भी स्थापना की गई है।
चंद्र गिरी तीर्थ का इतिहास
श्रीदिगम्बर जैन समाज के अध्यक्षअनिल कुमार जैन ने बताया की डोंगरगढ़ में जो दिगम्बर जैन मंदिर हैयहां पर विराजित 1008 श्रीचन्द्र प्रभुभगवन की प्रतिमा बहुत प्राचीन है जो
कि रेलवे लाइन बनाने के समय 110 वर्ष पूर्व खुदाई करते समय प्राप्त हुई थी। 1008 श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा भी बहुत प्राचीन है जो कि एक तालाब से प्राप्त हुई थी और जब भी डोंगरगढ़ के आसपास खुदाई कीजाती है तो वहां दिगम्बर जैन प्रतिमा मिलना इस बात पुष्टि करता है कि पहले यहां बहुत बड़ा जैन तीर्थ रहा होगा जो प्राकृतिक आपदा आदिके कारण भूमिगत हो गया। ट्रस्ट के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन ने बताया किआचार्य विद्यासागर श्रीजी के विशेष कृपा एवं आशीर्वाद से तीर्थ क्षेत्रचंद्रगिरी मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से हो रहा है। यहां गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है।जिसका शुद्ध और सात्विक दूध और घी भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
