छत्तीसगढ़ की हृदयस्थली राजधानी रायपुर में विशाल 171 फिट का त्रिकाल चौबीसी जिनालय एवं सहस्त्र कूट जिनालय का आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के सानिध्य में हुआ शिलान्यास
रायपुर
-भक्त के अंदर जैसे परिणाम होते है,तो भगवान को भी साक्षात आना ही पड़ता है यह छत्तीसगढ़ में एक दूसरा तीर्थ क्षेत्र बनने जा रहा है उपरोक्त उदगार संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री प्रसाद सागर जी महाराज ने मालवीय रोड़ स्थित श्री आदिनाथ दि. जैन बड़ा मंदिर में प्रातःकालीन धर्म सभा में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि जब कोई बिल्डिंग जीर्ण हो जाती है तो उसको नया बनाना ही पड़ता है,उन्होंने भारतीय संस्कृति की व्याख्या करते हुये कहा कि यह श्रमण संस्कृति और वैदिक संस्कृति दौनों को मिलाकर बनी है,

श्रमण संस्कृति में सिद्धक्षेत्र अतिशयक्षेत्र एवं जिन मंदिर और जिन आयतन, जिनबिंब यह चलते फिरते साधु होते है जो कि श्रमण संस्कृति की जान होती है, इसीलिये सभी लोगों की भावनायें इससे जुड़ी होती है।




श्री सम्मेदशिखर जी,गिरनार जी,आदि सिद्धक्षेत्र तथा अतिशयक्षेत्र की वंदना करने से ही आपका पुण्य एकत्रित होता है उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आचार्य श्री का यह चौथा मंगल प्रवेश है जब हम लोगों ने विधान सभा रोड़ से प्रवेश किया तो देखा कि पुरानी इमारतों के स्थान पर नयी नयी इमारतें बन गयी है एवं स्वागत में केवल जैन समाज ही नहीं अपितु जैनेतर समाज भी खड़ी हुई है, गुरु के पदार्पण से जंगल में भी मंगल हो जाता है,

उन्होंने मध्यप्रदेश के खजुराहो की चर्चा करते हुये कहा कि सन्2018 में आचार्य श्री संघ का चातुर्मास हुआ तो हमने देखा कि वहां पर वैदिक संस्कृति और जैन संस्कृति के आठवीं नौवीं शताब्दी के आलीशान मंदिर है एवं बड़े बड़े जिनालय भगवान आदिनाथ शांतिनाथ और पार्श्वनाथ के बने हुये है जिसकी दीवारों की कलाकृतियां एवं भित्तिचित्रों का समावेश है, जो आज भारतीय संस्कृति की गौरवगाथा को कह रहे है, यदि उस समय के श्रावक श्रैष्ठीओं ने यदि यह जिनालयों का निर्माण नहीं कराया होता तो कैसे आज की युवा पीढ़ी उसको देखती उन्होंने कहा कि आज भले ही कम्प्यूटर का जमाना हो लेकिन आज की युवा पीढ़ी को वहां के जिन मंदिरों की उस कलाकारी को अवश्य देखना चाहिये जो किसी राजा महाराजा ने निर्माण नहीं कराये बल्कि एक श्रावक श्रैष्ठी पाहिल सेठ ने अपनी पूरी सम्पत्ति को बेचकर श्री आदिनाथ जिनालय श्री पारसनाथ जिनालय का निर्माण कर एक शिलालेख लिख दिया कि “आनेवाले समय में जो भी इसकी सुरक्षा करेगा संरक्षण संवर्धन और सेवा करेगा में उसके दास का भी दास बनूंगा”
मुनि श्री ने कहा कि उसके अंदर किसी भी प्रकार ठेकेदारी या स्वामित्व की भावना नहीं थी” कहते है कि बड़े बड़े भूकंप आए लेकिन वहा के जिनालय आज भी अपनी गौरवगाथा को कह रहे है जिस प्रकार खजुराहो के पाहिल सेठ ने वंहा पर जिनालयों का निर्माण किया आपके नगर में भी ऐसे श्रावक श्रैष्ठीओं की कमी नहीं है, जहा ऐसे श्रावक श्रैष्ठी होते है वहा पर कभी भुखमरी और प्राकृतिक संकट नहीं आते”
दयोदय महासंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विदिशा ने बताया कि श्री सकल दि. जैन समाज रायपुर के द्वारा श्री आदिनाथ दि. जैन बड़ा मंदिर कमेटी के सौजन्य से सामने भू खंड पर 171 फिट का विशाल तीन मंजिला जिनालय एवं 1008 प्रतिमाओं का सहस्त्रकूट जिनालय बनाने का संकल्प लेते हुये दौपहर में आचार्य श्री के संघ सानिध्य में शिलान्यास किया गया। धर्मसभा में दि. जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड़ के सभी ट्रस्टियों के साथ फाफाडीह,कचना,लाभान्डी, टैगोरनगर,डी.डी.नगर सहित भिलाई दुर्ग राजनांदगांव भक्त मौजूद रहे।एवं आहार का पुण्य लाभ इन्द्रकुमार,अनिलजैन अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य,राजकुमार, सतीश जी पार्षद गिरीश भाटापारा परिवार को मिला उन्होंने भी मंदिर निर्माण में अपना सहयोग प्रदान कर एक जिन प्रतिमा की स्वीकृति दी तथा जिनालय के निर्माण में सहयोगी नरेन्द्र जैन गुरूकृपा, बड़ा जैन मंदिर अध्यक्ष संजयनायक, सहित सभी ट्रस्टियों एवं झारखंड मध्यप्रदेश के विभिन्न नगरों से पधारे श्रावक श्रैष्ठिओं ने श्री फल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का संचालन महामंत्री राजेश जैन रज्जन ने किया इस अवसर पर बड़ी संख्या में धर्म श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के दर्शन कर महिला मंडल ने अष्ट द्रव्यों से पूजन कर धर्म लाभ लिया।
अच्छे कार्य के लिये हम वचन तो नहीं देते है लेकिन कभी न भी नहीं करते उपरोक्त उदगार संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज
नवीन मंदिर के भूमी पूजन एवं शिलान्यास के अवसर पर सांयकालीन सभा में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा कि मितव्ययिता के साथ कार्य को करना है, आप लोगों ने जो मांगलिक कार्य करने का संकल्प लिया है उस कार्य को दृढ़ता पूर्वक करेंगे तो वह अवश्य पूर्ण हो जाएगा उन्होंने कहा कि तिल्दा में तो बहुत छोटी सी समाज है लेकिन यहा सुनते है कि सातसो आठसौ परिवार है तो किसी प्रकार कोई समस्या आने बाली नहीं समाज की ओर से गुरूदेव को चार पांच दिन का समय दैने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने कहा कि हम कभी किसी को न तो कहते नहीं लेकिन हा करना भी बहुत कठिन होता है, आप लोगों का यह मांगलिक कार्य मांगलिक वा तावरण के साथ हुआ आप लोग कही भी अटके नहीं, भटके नही और काम समय पर पूर्ण हो जाए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
