वर्तमान की शिक्षा प्रणाली हमे अंधकार की और धकेल रही है संथान सागर महाराज
एलोरा
परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री संथानसागर महाराज ने वर्तमान की शिक्षा प्रणाली और भारत मे आ रही पश्चिमी संभ्यता पर कटाक्ष किया महाराज श्री ने कहा उन्होने सूरज का उदाहरण दिया कहा सूरज जब जब पश्चिम गया तब तब डूबा है भारतीय संस्कृति पुरब की संस्कृति है पश्चिम की नहीं
महाराज श्री ने कहा तीन शब्द है प्रकृति विकृती संस्कृति दूध का उपयोग करके उससे शरीर को पुष्ट बनाना है ये दूध की प्रकृति है इसका फटना विकृति है लेकिन भारतीय संस्कृति मे दूध को जमाकर दही बनाकर उसको मथकर उससे घी बनाना यह भारतीय संस्कृति है




मार्मिक शब्दों मे महाराज श्री ने कहा कि भारत मे लुखी रोटी खाकर भी प्रभु के आगे घी का दीपक चलाया जाता है यह केवल भारत की संस्कृति है यहाँ दुसरो को खिलाकर फिर खाया जाता है पूज्य श्री शोलापुर से आए श्राविका संस्था के 150 सदस्यों को संबोधित कर रहे थे शिक्षा विद्या के लक्ष्य को कभी नहीं भूलना चाहिए शिक्षा का उद्देश्य सविमुक्ति है जो मुक्ति का मार्ग बता दे वह शिक्षा कहलाती है
महाराज श्री ने कहा वर्तमान की शिक्षा प्रणाली शिक्षा नीति हमे अंधकार की और धकेल रही है जबकि हमे उजाले की और जाना है तमसो मा ज्योतिर्गमय की प्रार्थना होती है हमे अंधकार से प्रकाश की और जाना है यह भारती शिक्षा ही हमे बता सकती है
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
