आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के मंगल विहार पर एक काव्य रचना
जन जन में ये खबर चली है पता चला है।
गुरुवर का नेवरा नगरी से विहार हुआ है।
लगता है लाभांडी का फिर भाग्य खुला है।
जन जन में ये खबर चली है पता चला है ।।
गुरुवर का नेवरा नगरी से विहार हुआ है…..
पड़ी है सर्दी तेज तभी ये विहार हुआ है।




महातपस्वी से सबका उद्धार हुआ है ।।
तूं है सर्दी मैं हूँ तपस्वी तप तैयार हुआ है।
जन जन में ये खबर चली है पता चला है।
गुरुवर का नेवरा नगरी से विहार हुआ
है….
कोहरा से देखो रस्ता भी ढंका हुआ है।
आचार्यश्री विद्यासागर का विहार हुआ है।
देख महातप इन्द्रों का उद्धार हुआ है।
जन जन में ये खबर चली है पता चला है।
गुरुवर का नेवरा नगरी से विहार हुआ है.
सुरेन्द्र जैन सुगन पुष्प बाड़ी सांकरा धरसीवा रायपुर रचित
