घाटोल के पंचकल्याणक, की चर्चा पूरे देश में हुई है दान ,पूजा ऊंचाइयों पर ले जाती है मुनिश्री

धर्म

घाटोल के पंचकल्याणक, की चर्चा पूरे देश में हुई है दान ,पूजा ऊंचाइयों पर ले जाती है मुनिश्री

घाटोल
अयोध्या नगरी को तीर्थंकर वाटिका श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के सामने प्रतापगढ़ रोड एन एच 56 में सर्वश्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि विमल सागर ,मुनि अनंत सागर मुनि धर्म सागर , मुनि भाव सागर महाराज के सानिध्य में एवं प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी प्रदीप “सुयश” भैया अशोक नगर के निर्देशन में पंच कल्याणक महोत्सव का समापन भगवान के मोक्ष कल्याण जुलूस यात्रा साथ श्रीजी को वेदी विराजमान के साथ हुआ।

 

 

 

 

नगर में मोक्ष कल्याणक मनाया गया
प्रातःकाल की बेला में नव प्रभात की नई किरण के साथ भगवान आदिनाथ को निर्वाण प्राप्ति (मोक्षगमन) हुई अग्नि कुमार देवो का आगमन हुआ , नख केश विसर्जन, किए गए सिद्ध गुणारोपण विधि, हुई सिद्ध पूजन, मोक्ष कल्याणक पूजन, विश्व शांति महायज्ञ किया गया,मान स्तंभ में एवं तीन वेदी में श्री संभावनाथ भगवान, श्री सुपार्श्वनाथ भगवान,श्री शांतिनाथ भगवान आदि अनेक प्रतिमाएं विराजमान की गई,विशाल रथ यात्रा निकाली गई,जिसमें प्राचीन रथ के साथ ,2 पालकी गंध कुटी मैं प्रतिमाएं विराजमान थी,3 हाथी,7 घोड़े,11 विशेष रथ चल रहे थे,नासिक के ढोल पर लोग भक्तिमय नृत्य करते हुए लोग चल रहे थे,लोग केसरिया पीले सफेद वस्त्रो में नजर आ रहे थे,

 

इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि विमल सागर महाराज ने कहा कि भावना करो कि भगवान कैलाश पर्वत पर विराजमान है, बर्फ जमी हुई है, सिद्ध प्रभु के आत्मा के प्रदेश संपूर्ण लोक में फैल जाते हैं, हम मन के द्वारा सिद्ध क्षेत्रों पर जा सकते है, भगवान का शरीर कपूर की भाँति बिखर गया, यह पावन, पुनीत क्रिया मोक्ष जाने में कारण बनती है, यह भस्म परम सौभाग्य मानकर अपने मस्तक पर लगाते है, आज में पवित्र हो गया ऐसी भावना करते हैं, आचार्य श्री, मुनिगण उस भस्म को लगाते है , कब वह दिन आये जब सारे कर्म भस्म हो जाए, यह पुण्य संचय की क्रिया है, जीव ने यह भावना भायी थी कि स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, इसी के लिए यह पंचकल्याणक हुआ है,यह कृपा गुरुदेव की हुई है, उन्ही की कृपा से यह पंचकल्याणक सम्पन्न हुआ, श्री वासुपूज्य भगवान की कृपा से यह सम्पन्न हुआ है,बागड़ के 72 गांव, शहर बेहतर है, वासुपूज्य भगवान तीन लोक के स्वामी है, सभी मंडल, संगठन के सहयोग से कार्य हुआ है, शासन प्रशासन ने भी सहयोग किया है,बुंदेलखंड के लोग चेतन का दान करते हैं, दान ,पूजा ऊंचाइयों पर ले जाती है ,

 

 

 

 

 

 

इस अवसर पर दिनेश खोडनिया ने कहा कि घाटोल के पंचकल्याणक, चातुर्मास की चर्चा पूरे देश में हुई है,इतनी व्यवस्थित व्यवस्था देखकर मैं गदगद हो गया, प्राचीन श्री वासुपूज्य भगवान को नवीन वेदी पर विराजमान करने का सौभाग्य प्रतीक मुंगाणिया को प्राप्त हुआ एवं प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य बदामी लाल धिरावत को प्राप्त हुआ


दोपहर में श्री वासुपूज्य मंदिर में
नवीन वेदी पर , प्रतिमाएं विराजमान की गई एवं कलशारोहण, ध्वजारोहण, महामस्तकाभिषेक ,शांतिधारा, हुई
कार्यक्रम में वीरोदय तीर्थ के अध्यक्ष मोहनलाल पिंडारमिया भी शामिल हुए

 


दोपहर में श्री आदिनाथ मंदिर मे नवीन मानस्तम्भ में 8 प्रतिमा विराजमान की गयी प्रभु की विशाल शोभायात्रा नगर में निकाली गई लोग भक्ति में नृत्य करते हुए चल रहे थे,नवीन वेदी पर , प्राचीन श्री वासुपूज्य भगवान विराजमान किये गये एवं 3 वेदी पर प्रतिमा विराजमान की गयी, महामस्तकाभिषेक संपन्न हुआ।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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