सरताज मुनि पुंगव सुधासागर को नमन करता दिखाई दिया ताज

धर्म

सरताज मुनि पुंगव सुधासागर को नमन करता दिखाई दिया ताज
आगरा
पावन है वो धरा
जिसे हम कहते आगरा
जी हा दो दिन में विश्व की अनुपम कृति जिसे हम जब ताजमहल कहते हैं। आने वालों को देख तक यह ताज इतराता है। बस उच्चता लिए खड़ा दिखाई देता है।

 

 

लेकिन इन दो दिनो मे देखने को मिला जब जैन धर्म के सरताज, निर्ग्रंथ मुनिराज सुधा सागर महाराज जब इस ताज खेमे परिसर बैठ कर धर्म सभा कर रहे थे।

 

साक्षात दिगंबर मुद्रा मुनिराज सुधासागर महाराज की निर्मोहीता, उनकी साधना को देख उनके ध्यान मुद्रा को देख स्वयं ताज भी नमन करता दिखाई पड़ रहा था। जिनकी साधना को देख चित्रकार, भी शर्मा जाता है, ऋषि मनीषी भी अचरज में पड़ जाते हैं। तो भला ताज की क्या मिसाल, सचमुच यह आपमें है कमाल।

 

 

है हमारे दिगंबर मुनिराज
जैन धर्म के सरताज
जिनके आगे नमन करता दिखा ताज
अब होगा स्वर्णिम उदय
क्योंकि बनने जा रहा तीर्थ लोकोदय

 

 

 

आज देखने को मिला खुला आकाश है, भारी शीतलहर है यमुना नदी का किनारा है। लेकिन दिगंबरत्व की पहचान बन आकाश उड़ान और धरती बिछोना मानकर पूज्य गुरुदेव ध्यान मुद्रा में दिखाई दिए।

सुधा शब्द की व्याख्या भी महान है
जी हा निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव सुधासागर महाराज का नामकरण आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने दूर दृष्टि सोच के साथ रखा। जी हा यदि नाम को सीधे अर्थ में देखें तो सुधा यानी कि सुधा सागर महाराज सुधा का रसपान कराते हुए धर्म की प्रभावना कर रहे हैं। यदि उनके नाम को विपरीत किया जाए तो इसका अर्थ होता है धासू यानी जो कार्य उनकी प्रेरणा एवं आशीष से होते है, वे विश्व पटल एक आयाम को छू लेते है। जिसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नही है।
सचमुच है गुरुवर
तुम विश्व धर्म के सूरज हो
तप त्याग की अद्भुत मूरत हो
है धन्य धन्य महिमा तेरी तम हरने वाले सूरज हो
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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