गोद भराई मेहंदी वह हल्दी रस्म
घाटोल
नगर में मुनि विमल सागर महाराज के संघ के सानिध्य में होने वाली भव्य ऐतिहासिक पंच कल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत आज नगर में प्रतिष्ठा में भगवान के माता-पिता बने पात्रों के साथ ही समस्त इंद्र इंद्राणी परिवार का आज महिला मंडल एवं समस्त नगर वासियों ने गोद भराई के साथ ही मेहंदी एवं हल्दी लगाने की रस्म अदायगी का कार्यक्रम संपन्न किया।
वहीं रात्रि में महिला मंडल की अध्यक्षा गुंजन शाह एवं उनके कमेटी सदस्य के साथ ही आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर महिला मंडल एवं अन्य महिला मंडल के समूह ने शोभा यात्रा के

माध्यम से पंचकल्याण प्रतिष्ठा में भगवान के माता-पिता बने लालावत अजीत कुमार एवं शांति देवी सो धर्म इंद्र बने लालावत धनपाल एवं सुभद्रा देवी के साथ ही कुबेर इंद्र , भरत चक्रवर्ती, बाहुबली, महेंद्र इंद्र, सनत कुमार, पांनत इंद्र इत्यादि अनेक इंद्र इंद्राणी के साथ ध्वजारोहण करता परिवार व पंच कल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव में बने सभी पात्रों का बहुमान करते हुए गाजे बाजे के साथ जुलूस के रूप में भव्य पंडाल में पहुंचे जहां पर महिला मंडल ने पीली व हरे रंग कि पोशाक पहनकर वह मंगल गीत गाते हुए भक्ति नृत्य करते हुए नाटक के माध्यम से मेहंदी एवं हल्दी लगाने की रस्मो की अदा की।




वहीं दोपहर में भगवान के माता-पिता बने नाभी राय एवं मरु देवी माता का संपूर्ण समाज ने गोद भराई की रस्म की वही
इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि विमल सागर महाराज ने कहा कि आपदा आने पर प्रभु को याद करते हैं,जब अच्छे रहते हैं, तो भगवान को याद नहीं करते, सुखी रहने का उपाय है दुख में सुख ढूंढो,मैं अजर अमर हूं यह भावना भाना चाहिए, पूरे बागड़ की समाज जब वात्सल्य भोज करेगी तो भूमि पर एनर्जी आएगी,सबको आनंद के साथ सौभाग्य समझ कर कार्य करना है, पंचकल्याणक में जो भी कार्य मिले अच्छे से करना है, जो लाइट में नहीं रहते हैं उनको सबसे ज्यादा आशीर्वाद मिलता है, जो मंच पर नहीं आ पाते हैं ,बड़े-बड़े सौधर्म इंद्र दास बनकर कार्य करते हैं, हम बुराइयों में अच्छाईया देख सकते हैं,

मुनि भाव सागर महाराज ने कहा कि नर से नारायण बनने के

लिए व्यक्ति को कम खाना गम खाना और नम जाना चाहिए, अपने जीवन में श्रद्धा, समर्पण, साहस ,संतोष ,शांति ,धैर्य रखना चाहिए, व्यक्ति का जीवन लिफाफे की तरह है, जो तीन बार में पोस्ट हो जाता है, इसी प्रकार जीवन में तीन मोड़ आते हैं, पहला मोड बाल्यावस्था है, दूसरा मोड जवानी का और तीसरा मोड बुढ़ापे का आता है, बुढ़ापा आने के बाद कभी जाता नहीं है, बल्कि व्यक्ति के जीवन को लेकर जाता है, पंचकल्याणक महोत्सव में पाषाण से परमात्मा बनते देखने का अवसर प्राप्त होता है, भगवान के जन्म कल्याणक पर पूरे नगर में मिठाई बांटना चाहिए, गौशालाओं को दान देना चाहिए, यह प्राण प्रतिष्ठा कहलाती है ,

जैसे नोट पर रिजर्व बैंक की मोहर होती है तो कीमत होती है ऐसे ही प्रतिमा पर मंत्र के द्वारा संस्कार होते हैं, तभी वह प्रतिमा पूज्य बन जाती है ,पूर्वजों ने 700 वर्ष प्राचीन मंदिर प्रदान किया है ,यहां 900 वर्ष से अधिक प्राचीन श्री वासुपूज्य भगवान को आप विराजमान करेंगे ,वह सौभाग्यशाली क्षण होंगे यह वेदी महाप्रतिष्ठा होगी ,विदेश एवं पूरे भारत से लोग आएंगे ,नवनिर्मित प्रतिमाओं की पंचकल्याणक के माध्यम से प्राण प्रतिष्ठा होती है ,पत्थर से परमेश्वर बन जाते हैं ,कमेटी ने बताया 10 दिसंबर को सभी पंचकल्याणक के महापात्रों के घर में समाज के लोग जाएंगे, 11 दिसंबर को प्रातः काल 8 बजे घटयात्रा ,ध्वजारोहण और गर्भ कल्याणक पूर्व रूप की मांगलिक क्रियाएं संपन्न होगी,
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
