जनसंत उपाध्याय विरंजन सागर महाराज का पिच्छिका का परिवर्तन संपन्न
शाहगढ
आचार्य श्री 108 विरागसागर महाराज के परम शिष्य उपाध्याय विरंजन सागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन संपन्न हुआ।
इस आयोजन में नैनागिरी क्षेत्र में विराजमान होने वाली सप्त धातु की 500 किलो वजनी प्रतिमा की अगवानी नगर में हुई। दोपहर की बेला में महाराज श्री का पिच्छिका परिवर्तन संपन्न हुआ।



इस अवसर पर महाराज श्री ने कहा कि आज संयम उपकरण का दिन है आज आप सभी संयम की अनुमोदना करने दो दूर से आए हैं दिगंबर संतो का उपकरण यह मयूर पिच्छिका है। जो अहिंसा धर्म का प्रतीक है। इसमें पांच गुण होते हैं।
महाराज श्री ने आगे कहा कि जैन साधु संत चातुर्मास में एक ही स्थल पर रहते हैं, ताकि बरसात में जीव हिंसा ना हो। यह पिच्छी परिवर्तन नहीं है बल्कि यह अपनी वृत्ति, अधर्म परिवर्तन का दिन है। विकृति परिवर्तन का दिन है। संयम के मार्ग को श्रावक भी प्राप्त कर सके, इसी भावना को लेकर आज हम अनुमोदना करते है। वचनों और सर्वजीवों के कल्याण की भावना को लेकर पीछी का आदान प्रदान होता है।
इस पुनीत अवसर पर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष पदम सेठ ने चार माह मे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वालों का आभार जताया। पूज्य महाराज श्री के चरणों के पद प्रक्षालन का सौभाग्य संजय जैन खरगपुर परिवार को प्राप्त हुआ। मौजूद समस्त त्यागी वृत्तियां द्वारा पूज्य महाराज श्री के कर कमलो में नवीन पिच्छिका भेट की।
इन्हें मिला सौभाग्य
पूज्य महाराज श्री की पुरानी पीछिका श्रीमान सचिन जैन सागर को प्राप्त हुई।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
