पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज सानिध्य में सम्मेद शिखरजी स्थित गुणायतन में पर्यूषण पर धर्म और भक्ति का अभूतपूर्व संगम

धर्म

पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज सानिध्य में सम्मेद शिखरजी स्थित गुणायतन में पर्यूषण पर धर्म और भक्ति का अभूतपूर्व संगम
पारसनाथ
शाश्वत तीर्थ सिद्धों की भूमि सम्मेद शिखर पर पर्युषण महापर्व भक्ति उल्लास और उमंग के साथ मनाया जा रहा है।

 

 

 

इस पावन तीर्थ की तलहटी पर अनेक संत विराजमान है। और समस्त जिनालयों में धर्म की अभूतपूर्व गंगा बह रही है। जहां धर्म और भक्ति का अभूतपूर्व संगम दिख रहा है। केवल झारखंड से ही नहीं संपूर्ण भारतवर्ष के साथ विश्व से भी भक्त यहां आकर धर्म आराधना कर रहे हैं और अपने कर्मों की निर्जरा कर रहे हैं।

10 दिवसीय इस महापर्व पर 10 धर्म का पालन कर व्यक्ति अपने जीवन को सुचारू कर सकता है और जीवन को उन्नत बना सकता है और अपने जीवन को सुचारू चला सकता है।

 

 

 

गुणायतन में पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज सानिध्य में हो रहे श्रावक संस्कार शिविर में नियम संकल्प से लेकर व्यक्ति अपने को साधना के मार्ग पर लगा रहे हैं वह संत जीवन जीने की कला सीख रहे है। शुक्रवार के अनुपम क्षणों में पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने श्रीमुख से उत्तम शौच धर्म पर विस्तार से बताया सुबह से लेकर शाम तक महिला पुरुष धार्मिक वेशभूषा में तल्लीन रहते हैं। उत्तम क्षमा से लेकर उत्तम ब्रह्मचर्य तक चलने वाले इस पुनीत पर्व का जैन दर्शन में विशेष महत्व बताया गया है।

क्षमा,मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम,तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य इन सबके आगे उत्तम शब्द का उच्चारण किया जाता है और इन 10 धर्म को उत्तम माना गया है इन 10 धर्म का पालन कर व्यक्ति अपने जीवन को उन्नत करता है और अपने जीवन को साधना की ओर अग्रसर कर कर्म निर्जला करता है।

 

पूज्य मुनि श्री का कथन है कि कर्म में पवित्रता, आचरण में नम्रता व विचारों में निर्मलता ही उत्तम शौच धर्म का सूत्र है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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