वागड नँदौड गौरव क्षुल्लिका श्री सुविक्षमती माताजी का 38वा अवतरण दिवस-
राजस्थान के डुंगरपुर जिले के नँदौड नामक सामाजिक समरसता से भरे ग्राम के सेठ श्री प्रवीण जी जैन व नन्दा देवी के घर 5 सन्तानो में से तीसरी सन्तान के रूप में दिनांक 18 ऑक्टोम्बर सन 1986 को एक भव्यात्मा कन्या का जन्म हुआ
नाम -चेतना
शुरू से ही घर मे धर्म के संस्कार पल्लवित थे,माता-पिता सदैव गुरु सेवा में अग्रणी रहते है ग्राम नँदौड में सिर्फ उनका एक ही जैन परिवार था लेकिन भक्ति व शक्ति ऐसी की ग्राम में आने वाले प्रत्येक दिगम्बर सन्त या बड़ा संघ सब के प्रति पूर्ण वैयावृत्ति व भक्ति समर्पित होती थी।जिनके गृह चैत्यालय में लगातार साधु संघो के वर्षायोग तक सम्पन्न हुए।
आपके पिता स्व.श्री प्रवीण जी को कलिकाल श्रेयांस की उपमा से अलंकृत किया गया।
ऐसे धर्मात्मा परिवार में बालिका चेतना में वैराग्य व आत्मकल्याण के भाव जागृत थे जिन्होंने मात्र 20 वर्ष की आयु में युगश्रेष्ठ आचार्य शिरोमणि तपस्वी सम्राट श्री सन्मति सागर जी के लघुनन्दन, शास्त्रार्थ धुरंधर आगमकोविद आचार्य श्री सुविधिसागर जी के अतिशय हस्तो से सिद्ध क्षेत्र गिरनार की धरा पर सन 2007 में क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण की।
नाम मिला क्षुल्लिका श्री सुविक्षमती माताजी




स्वाध्याय तपस्वी वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज व आचार्य श्री सुविधिसागर जी गुरूराज संघ का जब मिलन प्रवास हुआ तब से आप गुरु आज्ञा व आशीष पूर्वक आचार्य श्री कनकनन्दी जी के सँघस्थ होकर शिक्षा अर्जन कर रही है।
अभी आप तीर्थराज सम्मेद शिखर जी में पूज्य मुनि श्री जयकीर्ति जी के संघ में विराजमान हैं।आचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज व आचार्य श्री सुविधिसागर जी गुरूराज जैसे दो महाज्ञानी गुरुओ की होनहार रत्न पूज्या क्षुल्लिका श्री सुविक्षमती माताजी के 38वे अवतरण दिवस पर कोटिश नमन
-श्री राष्ट्रीय जैन मित्र मंच भारत से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
