छतरपुर के दो युवा विपुल जैन अंकुर जैन संसार मार्ग से विरक्त होकर 25 अक्टूबर को लेंगे मुनि दीक्षा
छतरपुर
हम यह सोच सकते हैं कि एशो आराम है। अपार संपत्ति हो लेकिन फिर भी व्यक्ति इस नश्वर मानता है और संसार मार्ग को छोड़ विरक्ति की और अग्रसर होता है।
और मान लेता है की संपत्ति धन वैभव यह सब नश्वर है जीवन का लक्ष्य अध्याय कल्याण है। छतरपुर के दो नगर गौरव युवा विपुल जैन एवम अंकुर जैन संसार मार्ग से विरक्त होकर 25 अक्टूबर को आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज से बड़ौत में मुनि दीक्षा ग्रहण करेंगे। इन दोनों युवाओ की दीक्षा से पूर्व नगर में बिंदोरी एवं गोद भराई की गई ।
एक परिचय दीक्षार्थी विपुल जैन एवम अंकुर जैन का
छतरपुर के यह दोनो युवा दीक्षा के मार्ग की ओर बढ़ रहे हैं। एवं संसार से विरक्ति लेकर आत्म कल्याण के मार्ग की ओर अग्रसर हैं, जैन ट्रेवल्स कंपनी जो एक बस कंपनी है उस परिवार के युवक विपुल जैन जो इंजीनियर विनोद उषा जैन के सुपुत्र हैं। परिवार में सब कुछ संपन्नता होने के बावजूद भी इन्होंने वैराग्य का कठिन मार्ग चुना। अगर हम अंकुर जैन पर नजर डालें तो अंकुर जैन ने एमकॉम तक अध्ययन किया है इनके पिता अजय जैन एवम माता का नाम ममता जैन है।

इनके पिता एक कपड़ा व्यापारी हैं। इन दोनों युवाओं की दीक्षा से पूर्व नगर में दो दिन तक भव्य आयोजन चले। हल्दी एवं बिंदोरी निकाली गई। 25 अक्टूबर को आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के कर कमलों सेसे इन दोनों युवाओं की बड़ौत में दीक्षा होगी। यह बिंदोरी यात्रा नगर के प्रमुख मार्गो से निकाली गई। जब दीक्षा गुरु द्वारा दी जाती है तब परिवार की अनुमति भी ली जाती है और उसे समय भी दीक्षा लेने वाले व्यक्ति से पूछा जाता है कि तुम दीक्षा को तैयार हो तमाम प्रकार के लालच आदि पूछा जाता है

परीक्षा पर खरे उतरने के बाद ही उनके वैराग्य एवं संकल्प को देखा जाता है तब गुरु दीक्षा देने की और कदम बढ़ाते हैं। यह भी एक शाश्वत सत्य है कि जो व्यक्ति दीक्षा का भाव बना लेता है या जिसके जीवन में विरक्ति का भाव आ जाता है। उसे संसार रास नहीं आता है। दीक्षा लेने से पूर्व कई वर्षों तक दीक्षा लेने वाले गुरु की शरण में रहकर धर्म अध्ययन एवं शिक्षा प्राप्त करते हैं। समय-समय पर गुरु परीक्षा भी लेते हैं। जब वे तपस्या का सुपात्र मान लेते हैं तब गुरु द्वारा मुनि दीक्षा दी जाती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
